बंगाल ने लंबे समय तक बम, हिंसा और भय का दौर देखा, अब जमीन पर उतर रहा भरोसे का संकल्प : अमित शाह

Amit Shah Bengal Visit: सिलीगुड़ी में अमित शाह ने कहा कि बंगाल में भय की जगह अब भरोसे का राज कायम हो रहा है. नयी न्याय संहिताओं BNS, BNSS और BSA से प्राथमिकी दर्ज होने के बाद 3 साल के भीतर सुप्रीम कोर्ट तक न्याय मिलेगा.

Amit Shah West Bengal Visit: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि बंगाल ने लंबे अरसे तक बम, हिंसा और भय का दौर देखा. अब जब राज्य में सरकार बदली है, तो भय की जगह भरोसे का संकल्प जमीन पर उतर रहा है. उत्तर बंगाल के सिलीगुड़ी में आयोजित एक प्रदर्शनी कार्यक्रम के दौरान ये बातें कहीं. अमित शाह की तीन दिवसीय बंगाल यात्रा के दौरान यहां प्रदर्शनी के माध्यम से बताया गया है कि तीनों न्याय संहिताएं किस प्रकार से नागरिकों, उनकी संपत्ति और सम्मान को सुरक्षित करेंगी.

‘बम धमाकों से डरता था बंगाल, होते थे एसिड अटैक’

अमित शाह ने कहा कि पिछली सरकार के शासन में रवींद्र संगीत से गूंजने वाला बंगाल बम धमाकों से डरता था. यहां एसिड अटैक होते थे. आरजी कर मेडिकल कॉलेज की बर्बरता हो या संदेशखाली की पीड़ा, दुर्गापुर मेडिकल में हुआ बलात्कार हो या साउथ कोलकाता लॉ कॉलेज में हुई छेड़खानी, सरकार कोई एक्शन नहीं लेती थी.

15 साल बाद सुनिश्चित हो रहा कानून का राज : शाह

अमित शाह ने कहा कि अब यहां सरकार बदलने के बाद कानून भी बदल रहा है. 15 साल बाद फिर से राज्य में कानून का राज सुनिश्चित हो रहा है. गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संदेश दिया था कि यहां भय नहीं, भरोसे का शासन होगा. पीएम ने जो वादा किया था, वह अब बंगाल में जमीन पर उतरता दिख रहा है.

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नयी न्याय संहिताओं में तकनीक का उपयोग : गृह मंत्री

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि हमने नवीन न्याय संहिताओं में तकनीक का उपयोग किया है. इससे पुलिस को जांच के दौरान ज्यादा तकनीकी साक्ष्य मिलेंगे, जिसके कारण न्याय मिलने की गति बढ़ेगी. प्रॉसीक्यूशन, पुलिस और न्याय व्यवस्था में लगने वाले समय को कम करने के कानून प्रावधान इन संहिताओं में किये गये हैं.

3 साल में सुप्रीम कोर्ट तक मिल जायेगा न्याय

गृह मंत्री ने कहा कि 2 साल में पश्चिम बंगाल में नवीन न्याय संहिताओं के पूरी तरह से लागू हो जाने के बाद किसी भी एफआईआर में 3 साल में सुप्रीम कोर्ट तक न्याय मिल सकेगा. जीरो एफआईआर और ई-एफआईआर का प्रावधान किया गया है, जिसका सबसे बड़ा फायदा बाहर पढ़ रही यहां की बच्चियों, बहनों और बेटियों, बैंकिंग फ्रॉड के पीड़ितों और देश में कहीं भी काम कर रहे बंगाल के नागरिकों को होगा.

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नये कानून दंड केंद्रित नहीं, पीड़ित केंद्रित

अमित शाह ने कहा कि नयी न्याय प्रणाली दंड-केंद्रित नहीं हैं. ये तीनों कानून पीड़ित-केंद्रित हैं. उन्होंने कहा कि महिलाओं और बच्चों को इनमें प्राथमिकता दी गयी है. 7 वर्ष से अधिक सजा के प्रावधान वाले सभी मामलों में फॉरेंसिक विजिट और रिपोर्ट अनिवार्य है. सभी ई-डॉक्यूमेंट स्वीकार करने के लिए अब अदालतें न्यायिक रूप से बाध्य हैं.

‘सिख दंगों में 3 दशक बाद भी नहीं हुआ न्याय’

सिख दंगों में 3 दशकों के बाद भी न्याय नहीं हुआ, भोपाल गैस त्रासदी में न्याय मिलने में 26 साल लगे, अजमेर सामूहिक दुष्कर्म में 32 साल लग गये. अब इन तीन T - Technology (टेक्नोलॉजी), Transparency (ट्रांसपेरेंसी) और Timeline (टाइमलाइन) से पूरी न्याय व्यवस्था बदलने वाली है.

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बंगाल की पिछली सरकार ने जारी नहीं किये नोटिफिकेशन

अमित शाह ने कहा कि पूरे देश में नवीन न्याय संहिताओं पर अमल शुरू हो गया था, लेकिन पश्चिम बंगाल की पिछली सरकार ने इसके नोटिफिकेशन नहीं जारी किये. उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने ऐसा नहीं होने दिया, क्योंकि नवीन न्याय संहिताओं पर अमल होते ही यहां सिंडिकेट, कट मनी, टोल टैक्स और भय का साम्राज्य चूर चूर हो जाता. पश्चिम बंगाल के चुनावों में हमने जनता से वादा किया था कि हम भय नहीं भरोसे की सरकार देंगे. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पद संभालते ही सबसे पहले नवीन न्याय संहिताओं को राज्य में लागू किया, जिससे भय की जगह भरोसे की सरकार की शुरूआत हुई.


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By मिथिलेश झा

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