गोजमुमो प्रमुख विमल गुरूंग ने तृणमूल पर खूब साधा निशाना, कहा गोरखालैंड शब्द से भी डरी हुई हैं सीएम

दार्जिलिंग: देश की खातिर अपने प्राणों की आहुति देनेवाले वीर गोरखा शहीदों को एक माला तक अर्पित नहीं करनेवाले बंगाल के मंत्री मुझे बक्से में डालकर पहाड़ से खदेड़ने की बात कर रहे हैं. यह बयान गोरखाओं के प्रति बंगाल की सोच को प्रदर्शित करता है. ये बातें गोजमुमो प्रमुख विमल गुरूंग ने गुरुवार को […]

दार्जिलिंग: देश की खातिर अपने प्राणों की आहुति देनेवाले वीर गोरखा शहीदों को एक माला तक अर्पित नहीं करनेवाले बंगाल के मंत्री मुझे बक्से में डालकर पहाड़ से खदेड़ने की बात कर रहे हैं. यह बयान गोरखाओं के प्रति बंगाल की सोच को प्रदर्शित करता है. ये बातें गोजमुमो प्रमुख विमल गुरूंग ने गुरुवार को शहर के मोटर स्टैंड में पार्टी की चुनावी जनसभा में कहीं.

जनसभा को संबोधित करते हुए श्री गुरूंग ने कहा कि राज्य की मुख्यमंत्री गोरखालैंड शब्द से भी डरी हुई हैं, इसलिए एक योजना के तहत उन्होंने इस बार नगरपालिका चुनाव में उम्मीदवार खड़े किये हैं. इस चुनाव के बाद तृणमूल जीटीए सभा के चुनाव में भी हिस्सा लेगी. वह 2011 में की गयी गलती को जीटीए सभा में प्रस्ताव पारित करके संशोधन करने की चक्कर में है. लेकिन ममता बनर्जी का यह सपना कभी पूरा नहीं होगा.

गोजमुमो प्रमुख ने कहा कि कुछ दिनों पहले तृणमूल कांग्रेस ने इसी मोटर स्टैंड में चुनावी जनसभा की थी. जिसमें राज्य के एक मंत्री इंद्रनील सेन ने मुझे, मोरचा के महासचिव रोशन गिरी और मोरचा उम्मीदवारों को बक्सा में बंद करके पहाड़ से खदेड़ने की बात कही थी. यह बयान गोरखाओं के प्रति बंगाल की सोच को दिखाता है. उन्होंने कहा कि देश की सीमाओं पर तैनात गोरखा सैनिक देश की सुरक्षा के दौरान दुश्मन की गोलियों से शहीद होता है, तो उनका पार्थिव शरीर राष्ट्रीय झंडे में लपेटकर बक्से में डालकर लाया जाता है. कभी बंगाल का कोई मंत्री इन शहीद गोरखा सैनिकों के त्याग और बलिदान की कद्र करते हुए एक माला तक नहीं चढ़ाने आता. ऐसे लोगों की गोरखाओं के बारे में क्या मानसिकता होगी?

श्री गुरूंग ने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जब-जब पहाड़ आती हैं, गोरखाओं की एकता तोड़ने के लिए कभी जाति के नाम पर विकाश बोर्ड गठित करती हैं, तो कभी कुछ और करती हैं. ममता ने कभी गोरखाओं को जोड़ने का काम नहीं किया. तृणमूली सरकार वोट के लिए प्रशासन का उपयोग कर रही है. पुलिस-प्रशासन हमारे कार्यकर्ताओं को पकड़ करके जेल भेज रहा है. लेकिन कितने दिन जेल में रखोगे? तीन महीना, छह महीना… एक साल. एक न एक दिन तो छोड़ना ही पड़ेगा. गोरखाओं के लिए जेलें छोटी पड़ जायेंगी.

श्री गुरूंग ने कहा कि बंगाल सरकार गोरखाओं पर जितना जुल्म कर रही है, इसकी सजा उसे भुगतनी पड़ेगी. तृणमूल कांग्रेस अपने घास फूल की सुरक्षा करने का काम करे, क्योंकि उसके आसपास कमल फूल खिलना शुरू हो चुका है. नगरपालिका चुनाव में मोरचा का चुनाव चिह्न उगता सूरज है. सूरज की रोशनी से घास फूल को जनता मुंहतोड़ जवाब देगी. जनसभा को रोशन गिरी, विनय तामांग आदि ने भी संबोधित किया.

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