गोरामुमो के महासचिव महेंद्र छेत्री ने साफ तौर पर कहा है कि जिस संगठन की कोई संवैधानिक मान्यता ही नहीं है भला उसको बहाल रखकर क्या फायदा होगा. वह सिलीगुड़ी जर्नलिस्ट क्लब में शुक्रवार को संवाददाताओं से बात कर रहे थे. उन्होंने कहा कि वहलोग सरकार से दागोपाप का दरजा बढ़ाकर पूरे दार्जिलंग पर्वतीय क्षेत्र में छठी अनुसूची लागू करने की मांग कर रहे थे. केंद्र में तत्कालीन यूपीए तथा राज्य में तत्कालीन वाम मोरचा सरकार ने इसकी मंजूरी दे भी दी थी. बाद में राजनीतिक कारणों से इस मांग को दबा दिया गया.श्री छेत्री ने आगे कहा कि जीटीए की संवैधानिकता को लेकर पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा चल रहा है.
एक दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाइ कोर्ट को इस मामले की सुनवाइ कर जीटीए की संवैधानिक स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहा है. आने वाले दिनों में कोई नहीं कहा सकता कि जीटीए का भविष्य आखिर क्या होगा. श्री छेत्री ने इस मौके पर जीटीए पर वर्तमान में सत्तारूढ़ गोजमुमो तथा जीटीए चीफ बिमल गुरूंग पर हमला बोला और उनपर घोटाले का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि जीटीए से पहाड़ का कोई विकास नहीं हुआ है. सिर्फ घोटाले हुए हैं. गोजमुमो नेताओं ने जीटीए के द्वारा अपनी जेबें भरने के अलावा और कुछ नहीं किया है.वह जीटीए के कामकाज को लेकर कई बार आरटीआइ दायर कर विभिन्न तथ्यों का पता कर चुके हैं.उनके पास घोटाले का पूरा सबूत है.वह इस मामले को लेकर राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से भी मुलाकात कर उन्हें पूरे मामले की जानकारी देंगे.
