पोइला बैशाख पर हुई करला माता की पूजा

जलपाईगुड़ी. जलपाईगुड़ी शहर के बीच से बहने वाली करला नदी दिन-ब-दिन प्रदूषित होती जा रही है. केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय की ओर से पश्चिम बंगाल की नदियों में प्रदूषण संबंधी जो सूची जारी की गयी है, उसमें करला नदी सबसे प्रदूषित नदियों में शामिल है. नदी के किनारे सिंचाई विभाग की ओर से अनेक साइन बोर्ड […]

जलपाईगुड़ी. जलपाईगुड़ी शहर के बीच से बहने वाली करला नदी दिन-ब-दिन प्रदूषित होती जा रही है. केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय की ओर से पश्चिम बंगाल की नदियों में प्रदूषण संबंधी जो सूची जारी की गयी है, उसमें करला नदी सबसे प्रदूषित नदियों में शामिल है. नदी के किनारे सिंचाई विभाग की ओर से अनेक साइन बोर्ड लगवाये गये हैं, जिनमें नदी में गंदगी और कचरा फेंकने के लिए मना किया गया है.

इसके बावजूद शहरवासी नदी में कूड़ा-कचरा फेंक रहे हैं. इस समस्या को ध्यान में रखते हुए बांग्ला नववर्ष के दिन सुबह जलपाईगुड़ी शहर के बाबू घाट पर ‘करला मां’ की पूजा की गयी.


करला मां की प्रतिमा मत्स्य कन्या के रूप में तैयारी की गयी. पूजा का आयोजन शहर की समाज और नदी बचाओ कमेटी की ओर से किया गया. रीति के अनुसार, ढाक-ढोल बजाकर और मंत्रोच्चार कर करला माता की पूजा की गई. महानंदा अभयारण्य से निकालने वाली करला नदी जलपाईगुड़ी शहर के 11 किलोमीटर इलाके में बहती है. नदी में गंदा पानी और कचरा डाले जाने की वजह से यह अत्यधिक दूषित हो गयी है. पानी में रहने वाले जीव-जंतु, मछलियां व वनस्पतियां नष्ट होने के कगार पर हैं. जलपाईगुड़ी शहर के विभिन्न हाट-बाजारों का कचरा, थर्माकोल के बक्से आदि इसी नदी में फेंके जा रहे हैं. शहर के घरों से निकलने वाला कचरा भी इसी नदी में जा रहा है.

जलपाईगुड़ी नगरपालिका करला नदी को प्रदूषणमुक्त करना चाहती है. लेकिन नगरपालिका के चेयरमैन मोहन बोस इस बारे में कोई ठोस कार्ययोजना नहीं बता सके. बस इतना हुआ है कि जलपाईगुड़ी जिला सिंचाई विभाग ने करला नदी के किनारे जगह-जगह साइन बोर्ड लगवा कर लोगों को नदी साफ रखने की हिदायत दी है. लेकिन इसका कोई खास लाभ नहीं हो रहा है. नदी में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है. समाज और नदी बचाओ कमेटी के संयोजक संजीव चटर्जी ने कहा कि नदी प्रदूषण का मामला सिंचाई और नगर प्रशासन के तहत आता है. हम तो बस लोगों को जागरूक ही कर सकते हैं. करला माता की पूजा का आयोजन जागरूकता का ही एक प्रयास है. करला मां नाम से कोई विग्रह न होने के बावजूद हमने उन्हें मत्स्य कन्या का रूप देकर लोगों को नदी के प्रति सचेत करने का प्रयास किया है.

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