फासले हुए कम: मात्र सौ रुपये में हिलसा मछली की बिक्री, सीमा पर मिलन मेला की धूम

जलपाईगुड़ी: तीस्ता नदी जल बंटवारे को लेकर कूटनीतिक स्तर पर चाहे जितनी भी दूरी क्यों ना हो, दोनों देशों के आमलोगों के दिल के बीच की दूरी नहीं है. कमोबेश यहां आयोजित मिलने मेले में तो कुछ इसी प्रकार का नजारा देखने को मिला.बांग्लादेश के हिलसा मछली की बिक्री जोरदार रही. बांग्लादेशी लोगों ने भारत […]

जलपाईगुड़ी: तीस्ता नदी जल बंटवारे को लेकर कूटनीतिक स्तर पर चाहे जितनी भी दूरी क्यों ना हो, दोनों देशों के आमलोगों के दिल के बीच की दूरी नहीं है. कमोबेश यहां आयोजित मिलने मेले में तो कुछ इसी प्रकार का नजारा देखने को मिला.बांग्लादेश के हिलसा मछली की बिक्री जोरदार रही. बांग्लादेशी लोगों ने भारत के लोगों को बहुत ही कम कीमत पर हिलसा मछली का स्वाद चखाया.दो हिलसा मछलियों की कीमत मात्र सौ रुपये रखी गयी थी. हांलाकि कुछ स्थानों पर दो सौ रूपये में भी हिलसा मछली बिकी.

इतनी कम कीमत पर हिलसा मछली की बिक्री देख लोग टूट पड़े. सीमा पर सुरक्षा के लिए तैनात बीएसएफ जवानों को भीड़ को संभालना मुश्किल हो रहा था. हांलाकि बाद में मछलियों की कीमत भी थोड़ी बढ़ा दी गयी.

हिलसा मछली बिक्रेता साबिर अली ने बताया है कि करीब सौ किलो मछली बिक गयी. यहां उल्लेखनीय है कि हर साल ही पहला वैशाख के एक दिन पहल सीमा पर नियम कानून में थोड़ी ढ़ील दी जाती है. कांट तार के घेरे तक दोनों देशों के लोगों को आने दिया जाता है. जिससे कि इस पार तथा उस पर बंगाल के लोग आपस में मिल सकें. सीमा पर बसे ऐसे लोगों की संख्या काफी है जिनका कोई ना कोई रश्तेदार सीमा के उसपार बांग्लादेश में रहता है.मिलन मेले के द्वारा ऐसे लोग आपस में मिल पाते हैं.

लोग एक दूसरे को हालचाल जानते है और उपहारों का आदान प्रदान करते हैं.मिलन मेला को लेकर सीमा पर मेले जैसा माहौल होता है और दुकानें भी लगा दी जाती है.बांग्लादेश के पंचमगढ़ के रहने वाले एक मछली कारोबारी साबिर अली का कहना है कि हिलसा मछली की काफी मांग भारत में है. वह चाहते तो और भी अधिक कीमत पर मछली बेच सकते थे,लेकिन ऐसा नहीं किया. इसबीच,मिलन मेला को लेकर जलपाईगुड़ी के राजगंज थाना अंतर्गत भेलापाड़ा,भाटपाड़ा आदि सीमावर्ती इलाके में सुरक्षा के तगड़े इंतजाम किये गए थे.सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) राधाबाड़ी सेक्टर के अधीन 155 नंबर बटालियन के कुंदन,भोलापाड़ा,चावलहाटी के करीब दस किलोमीटर इलाके में मिलन मेला लगता है.इसके लिए बीएसएफ तथा बांग्लादेश के बीबीजी द्वारा भी विशेष तैयारी की जाती है. दूसरी ओर मिलन मेला में आने वाले लोगों ने साल में दो बार इस प्रकार के आयोजन की मांग की है.

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