सिलीगुड़ी: सिलीगुड़ी नगर निगम के वार्ड नंबर बीस के सुभाषपल्ली इलाके में एक फरजी प्रशिक्षण केंद्र का खुलासा हुआ. दिशा इंस्टीच्यूट नामक यह केंद्र सुभाषपल्ली निवासी रनजीत सिंह के घर में चलरहा था. इस संस्था में काम करने वाले कर्मचारियों ने ही इस फरजी प्रशिक्षण केंद्र का खुलासा किया. संस्था के सिलीगुड़ी के प्रबंधक पार्थ मंडल ने इसके मालिक व उनकी पत्नी के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज करायी है.
सिलीगुड़ी थाने की पुलिस ने मालिक की पत्नी स्वामिमा नासिम(हलदार) को गिरफ्तार किया है. साथ पूछताछ के लिये संस्थान के कुल 36 कर्मचारियों को हिरासत में लिया गया है. इलाकावासियों का कहना है कि गिरफ्तार महिला इससे पहले भी एक फरजी संस्थान चलाने के आरोप में गिरफ्तार हो चुकी है.
स्थानीय लोगों द्वारा मिली जानकारी के अनुसार कुछ महीने पहले सिलीगुड़ी नगर निगम के वार्ड नंबर 20 स्थित भारत सेवा आश्रम के निकट रहने वाले रंजीत सिंह के घर में दिशा इंस्टीच्यूट नामक इस फरजी संस्थान को खोला गया. संस्थान के कर्मचारियों ने ही इसके फरजी होने का खुलासा किया. दिशा इंस्टीच्यूट में प्रबंधक के तौर पर नियुक्त पार्थ मंडल ने बताया कि करीब तीन माह पहले प्रबंधक के तौर पर उसे नियुक्त किया था. पार्थ कोलकाता के सोधपुर इलाके का निवासी है. उसके अनुसार कोलकाता स्थित दिशा इंस्टीच्यूट में उसका साक्षात्कार विमल हलदार उर्फ आकाश ने लिया था.
विमल हलदार उर्फ आकाश ने खुद को दिशा इंस्टीच्यूट का मेनेजिंग डायरेक्टर बताया था. पार्थ को दस हजार रूपए प्रतिमाह तनख्वाह देने का वादा कर सिलीगुड़ी भेज दिया गया. सिलीगुड़ी आने पर उसे बताया गया कि वो इवेजनर चिल्ड्रेन होम नामक एक संस्था का प्रबंधक है. आश्चर्य यह है कि पार्थ कोइ नियुक्ति पत्र नहीं मिला है. पार्थ ने बताया कि पिछले तीन महीने से उसे तनख्वाह नहीं दिये जा रहे हैं. सिलीगुड़ी में गुजारा करने के लिये कुछ रूपया दिया जाता था.
इवेजनर चिल्ड्रेन होम खोलने के नाम पर कुछ महिलाओं को भी नियुक्त किया गया. इन महिलाओं को अनाथ आश्रम के नाम पर बाजार से रूपया इकठ्ठा करने का काम सौंपा गया. पिछले कुछ महीनों में लाखों रूपए संग्रह जमा किये गए. जून के अंत में एक बैठक की गयी. इस बैठक में विमल हलदार भी उपस्थित था. तनख्वाह की मांग पर उसने सभी कर्मचारियों को काफी डराया, यहां तक किडनी बेच देने की भी धमकी दी. संस्था की एक वृद्ध महिला कर्मचारी शिखा राय ने कहा कि आठ हजार रूपए प्रतिमाह तनख्वाह देने के नाम पर उन्हें नियुक्त किया गया. वो भी अनाथ आश्रम के लिये बाजार से रूपया संग्रह करती थी. नियुक्ति के समय कहा गया था कि रोजाना संग्रह रूपये का सात प्रतिशत हिस्सा उन्हें देंगे. लेकिन आज तक उन्हें कुछ नहीं मिला. शिखा राय ने बताया कि नियुक्ति के समय सदस्यता के लिए उनसे दो सौ रूपए भी लिये गये थे.
