वन तस्करों पर बेहतर नियंत्रण के लिए वन कर्मचारियों ने अत्याधुनिक हथियारों से लैस एक टास्क फोर्स गठित करने की मांग की थी. लेकिन उनकी यह मांग आज तक वन मंत्रालय ने पूरी नहीं की है. राज्य सरकार ने इस दिशा में अभी तक कोई कदम नहीं उठाया है. अवैध शिकारियों और तस्करों पर लगाम लगाने के लिए वन कर्मचारियों की मांग पर कई बार टास्क फोर्स गठित करने का निर्णय लिया गया. लेकिन सरकारी उदासीनता की वजह से आज तक टास्क फोर्स गठित नहीं हुआ है. तस्करों की गिरफ्तारी और वन संपत्ति की जब्ती के बाद भी वन विभाग अब तक तस्करी को रोक पाने में विफल रहा है. इसकी वजह से वन कर्मचारी काफी हताश हो रहे हैं. देश के विभिन्न वनांचलों में वन संपत्ति और वन्य प्राणियों की तस्करी रोकने के लिए वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो काम कर रहा है. लेकिन पश्चिम बंगाल राज्य में इस तरह की कोई क्राइम कंट्रोल ब्यूरो नहीं है.
जबकि वन कर्मियों की ओर से यह मांग कई बार उठ चुकी है. वन कर्मचारियों की मांग है कि अविलंब वन विभाग रेंज के आधार पर वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो जैसी समर्पित टास्फ फोर्स गठित की जाये. वन संपत्तियों की सुरक्षा और तस्करी पर प्रभावी रोक के लिए इस टास्क फोर्स को अत्याधुनिक आग्नेयास्त्रों से लैसे किये जाने की भी मांग की गयी है. वन विभाग सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, वन विभाग सीमित इलाके में अभियान चलाकर तस्करों की गिरफ्तारी व वन्य प्राणियों के देहावशेषों को जब्त करता है. दायरा सीमित होने की वजह से तस्करी पर काबू पाना वन विभाग के लिये दुश्वार हो रहा है.
अगर राज्य स्तर पर टास्क फोर्स होती तो वन विभाग की शक्ति काफी बढ़ जाती. सीमित दायरे में अभियान से तस्करों पर कोई खास असर नहीं होता. वे आसानी से वैकल्पिक मार्ग तलाश लेते हैं. बंगाल में तस्कर अभी कीमती लकड़ियों के साथ विभिन्न विषैले प्राणियों के विष, वन्य प्राणियों के देहावशेषों व दुर्लभ जीवों की तस्करी कर रहे हैं. उत्तर बंगाल के वनों से वन्य प्राणियों की हो रही तस्करी के तार नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और चीन से जुड़े हुए हैं. चीन जैसे देशों में वन्य प्राणियों के देहावशेषों की मांग काफी अधिक है. जबकि बांग्लादेश, भूटान और नेपाल जेसे देश तस्करी के मार्ग के रूप में प्रयोग हो रहे हैं.
