मालदा : सर्टिफिकेट और ढांचागत सुविधाओं की मांग को लेकर गनीखान चौधरी इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने रेल रोक कर विरोध प्रदर्शन किया. शनिवार दोपहर ढाई बजे से साढ़े चार बजे तक अप गुवाहाटी-चेन्नई एक्सप्रेस को रोका गया. इसमें गनीखान चौधरी इंस्टीच्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नालॉजी के सैकड़ों विद्यार्थी शामिल हुए. इस आंदोलन से गुवाहाटी-चेन्नई एक्सप्रेस के साथ ही मालदा सहित कई स्टेशनों पर दूरगामी ट्रेन खड़ी दिखीं.
आंदोलनकारी विद्यार्थियों ने साफ तौर पर कहा कि इतने दिन विश्वविद्यालय परिसर के भीतर प्रदर्शन और सड़क अवरोध करने के बाद किसी ने भी उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया. बाध्य होकर उन्हें रेल रोको आंदोलन करना पड़ा है. विद्यार्थियों ने बताया कि इस विश्वविद्यालय में अध्ययनरत विद्यार्थी का कोर्स आगामी अगस्त महीने में समाप्त हो जायेगा.
लेकिन अब तक इस विश्वविद्यालय को मान्यता प्राप्त नहीं हुई है. फलस्वरूप पास होने के बाद भी किसी छात्र को उनका सर्टिफिकेट नहीं मिलेगा. गनीखान इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है. विश्वविद्यालय की शिक्षा व्यवस्था सुदृढ़ करने के लिए कई बार आवाज बुलंद की गयी, लेकिन प्रबंधन के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी.
विश्वविद्यालय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 16 मार्च, 2013 को इस विश्वविद्यालय का शिलान्यास तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने किया गया था. इस अवसर पर कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी एवं मानव संसाधन विकास मंत्री पल्लाम राजू भी उपस्थित थे. विश्वविद्यालय का एकेडमिक भवन निर्माण के बाद राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने इसका उद्घाटन किया था.
इस विश्वविद्यालय में वर्तमान में इंजीनियरिंग के 13 कोर्सों की पढ़ाई होती है, जिसमें करीब 720 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं. आंदोलनकारी छात्रा मेघा बेरा, शीतल जोयारदार, रूमि अहमद, असलम खान ने आरोप लगाते हुए कहा कि दो वर्ष का बीटेक कोर्स लगभग समाप्ति की ओर है.
मेकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, एवं फूड टेक्नालॉजी कोर्स के करीब 90 विद्यार्थी हैं. अगस्त महीने में इनका कोर्स समाप्त हो जाएगा. विश्वविद्यालय को मान्यता प्राप्त ना होने की वजह से किसी भी विद्यार्थी को उनका प्रमाण पत्र नहीं मिलेगा. इसी समस्या में विशवविद्यालय के 720 विद्यार्थी भी पड़े हैं.
