तमाम केन्द्रीय कर्मचारियों ने इसको लेकर केन्द्र सरकार के खिलाफ मोरचा खोल दिया है. खासकर रेलवे कर्मचारी इस वेतन वृद्धि से पूरी तरह से नाखुश हैं और अपने 11 सूत्रों मांगों के समर्थन में 11 जुलाई से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के लिए अडिग हैं. नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवे के महासचिव एम रघुवैया ने इस वेतन आयोग की सिफारिशों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है. उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार के इस निर्णय से केन्द्रीय कर्मचारी बेहद निराश हैं. केन्द्रीय कर्मचारी न्यूनतम वेतनमान 26 हजार रुपये प्रति महीने करने की मांग कर रहे थे, जबकि केन्द्र ने न्यूनतम वेतनमान प्रति महीने 18 हजार रुपये ही की है. केन्द्र सरकार के इस निर्णय की सभी रेलवे यूनियनों ने आलोचना की है. एनएफ रेलवे इंप्लाइज यूनियन के महासचिव मुनेन्द्र सैकिया ने भी 11 जुलाई से हड़ताल पर जाने की धमकी दी है.
उन्होंने कहा है कि पूरे देश के रेलवे कर्मचारियों के साथ-साथ पूर्वोत्तर सीमा रेलवे के कर्मचारी भी 11 जुलाई को सुबह 6 बजे से हड़ताल पर चले जायेंगे. इस बात की सूचना पूर्वोत्तर सीमा रेलवे के जीएम को 9 जून को ही दे दी है. उन्होंने कहा कि केन्द्र की वर्तमान एनडीए सरकार ने अब तक सबसे न्यूनतम वेतन वृद्धि की है. कई कर्मचारियों को तो इसका कोई लाभ नहीं होगा. देश की आजादी के बाद पहली बार जब वेतन आयोग का गठन हुआ था, तो 1966 में आयोग ने 14.2 प्रतिशत वेतन वृद्धि की सिफारिश की थी. वर्ष 2016 में सातवें वेतन आयोग के अनुसार भी मात्र 14.2 प्रतिशत ही वेतन वृद्धि की गई है.
लोके पायलटों के साथ-साथ गार्डों तथा एकाउंट विभाग के कर्मचारियों को अधिकतम वेतनमान की श्रेणी में रखने की मांग की गई थी, लेकिन उस दिशा में भी कोई कार्रवाई नहीं की गई है. संगठन के सिलीगुड़ी ब्रांच कमेटी के सचिव प्रदीप गजमेर तथ सेंटल वर्किंग कमेटी के सदस्य एवं कन्वेनर तनुज कुमार दे ने भी कहा है कि वह लोग सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों से पूरी तरह नाखुश हैं. पूरे देश के रेलवे कर्मचारियों के साथ ही पूर्वोत्तर सीमा रेलवे के कर्मचारी भी हड़ताल पर जायेंगे.
