सिलीगुड़ी: राज्य में पांच नये जिले बनाने की घोषणा के बाद सिलीगुड़ी को जिला बनाने की मांग ने एक बार फिर से जोर पकड़ लिया है. राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हालांकि पिछले वर्ष ही पांच नये जिले बनाने की घोषणा की थी. राज्य में दूसरी बार सत्ता संभालने के बाद उन्होंने अलीपुरद्वार में एक बार फिर से कहा कि कालिम्पोंग, आसनसोल, झारग्राम, सुंदरवन तथा बसीरहाट को नया जिला बनाया जायेगा. मुख्यमंत्री की इस घोषणा के बाद स्वाभाविक तौर पर एक बार फिर से सिलीगुड़ी को जिला बनाने की मांग ने जोर पकड़ लिया है. नया जिला बनाने की मांग को लेकर आंदोलनरत संगठन वृहत्तर सिलीगुड़ी नागरिक मंच ने ममता बनर्जी से सिलीगुड़ी को भी जिला बनाने की अपील की है.
संगठन के उपाध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने कहा है कि सिलीगुड़ी शहर कोलकाता के बाद राज्य में दूसरा सबसे बड़ा शहर है. इसके अलावा इस शहर को उत्तर बंगाल के अघोषित राजधानी के नाम से ही जाना जाता है. उसके बाद भी सिलीगुड़ी को जिला नहीं बनाया जाना अपने आप में काफी दुर्भाग्यपूर्ण है. मुख्यमंत्री चाहे जितने जिले बनाये, इसको लेकर किसी को कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन सिलीगुड़ी को भी जिला का दर्जा मिलना चाहिए. जनसंख्या तथा ढांचागत सुविधाओं के मामले में सिलीगुड़ी शहर कालिम्पोंग, झारग्राम तथा बसीरहाट के मुकाबले काफी आगे है. सिलीगुड़ी शहर के नजदीक ही बागडोगरा एयरपोट है. यह शहर पूर्वोत्तर का प्रवेशद्वार है. साथ ही इस शहर की आसपास की सीमाएं नेपाल एवं बांग्लादेश से लगती है. शहर की महत्ता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यहां नगरपालिका नहीं, बल्कि नगर निगम काम कर रहा है. उसके बाद भी सिलीगुड़ी को जिला नहीं बनाना अपने आप में काफी आश्चर्यजनक है.
श्री चटर्जी ने आगे कहा कि सिलीगुड़ी तथा जलपाईगुड़ी जिले के कुछ भाग को लेकर अलग जिला बनाने की मांग वह लोग काफी वर्षों से करते आ रहे हैं. पूर्ववर्ती वाम मोरचा सरकार के साथ-साथ सत्ता परिवर्तन के बाद तृणमूल सरकार तथा राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को कई बार इस मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा गया है. जिला नहीं बनने की वजह से सिलीगुड़ी के लोगों को इसकी काफी बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है. इतना ही नहीं, कई प्रकार की प्रशासनिक जटिलताएं भी हैं.
सिलीगुड़ी नगर निगम के अधीन 47 वार्डों में से 14 वार्ड जलपाईगुड़ी जिले के अधीन है. सबसे आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि सिलीगुड़ी पुलिस कमिश्नरेट के अधीन भक्तिनगर थाना है, लेकिन इस थाने में दर्ज मामले की सुनवाई जलपाईगुड़ी कोर्ट में होती है. सिलीगुड़ी शहर से भक्तिनगर थाने की दूरी मात्र दो किलोमीटर है, जबकि मामले की सुनवाई के लिए आम लोगों को 40 किलोमीटर दूर जलपाईगुड़ी जाना पड़ता है. इसी तरह से अन्य वार्डों की भी विकट समस्या है. विभिन्न कार्यों के लिए लोगों को सिलीगुड़ी शहर से करीब 75 किलोमीटर दूर दार्जिलिंग का चक्कर काटना पड़ता है. इससे समय और पैसे दोनों की बरबादी होती है. श्री चटर्जी ने यथाशीघ्र ही सिलीगुड़ी में मेट्रोपोलिटन कोर्ट स्थापित करने की भी मांग की.
जिले के नाम पर राजनीति
सिलीगुड़ी को अलग से जिला नहीं बनाये जाने पर कुछ लोगों का कहना है कि राज्य की तृणमूल सरकार इस पर राजनीति कर रही है. कालिम्पोंग को तो जिला बनाने का निर्णय ले लिया गया, लेकिन सिलीगुड़ी को नजरअंदाज कर दिया गया. इस बार के विधानसभा चुनाव में सिलीगुड़ी महकमा के तीनों सीटों में से एक भी सीट पर तृणमूल कांग्रेस की जीत नहीं हुई है. संभवत: इसी वजह से सिलीगुड़ी की उपेक्षा की जा रही है.
विधायकों से सहयोग की अपील
सिलीगुड़ी वृहत्तर नागरिक मंच ने सिलीगुड़ी को अलग से जिला बनाने की मांग को लेकर महकमा के तीनों विधायकों से सहयोग की अपील की है. संगठन के उपाध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने कहा है कि इस मामले को लेकर सिलीगुड़ी के विधायक अशोक भट्टाचार्य माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी के विधायक कांग्रेस के शंकर मालाकार तथा फांसीदेवा के विधायक कांग्रेस के सुनील तिरकी से बातचीत की गई है. इन सभी विधायकों ने सहयोग का आश्वासन दिया है. उन्होंने आगे कहा है कि इन तीनों विधायकों से अलग जिले की मांग को विधानसभा में उठाने की भी अपील की गई है.
