राज्य भाजपा कार्यकारिणी की बैठक संपन्न, दिलीप घोष बोले
ममता सरकार पर भी किया हमला
बांग्लादेशी आतंकियों को शरण देने का लगाया आरोप
सिलीगुड़ी : राज्य भाजपा कार्यकारिणी की दो दिवसीय बैठक शनिवार को संपन्न हो गयी. इस दौरान कई राष्ट्रीय व प्रांतीय स्तर के दिग्गज नेताओं और हजारों की तादाद में कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में कई प्रस्तावों पर सहमति बनी. अधिवेशन के समापन के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए भाजपा के बंगाल प्रांत के अध्यक्ष दिलीप घोष ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर बार-बार हो रहे हमलों की निंदा की है.
पड़ोसी देशों (बांग्लादेश और पाकिस्तान) में अल्पसंख्यक कभी भी सुरक्षित नहीं रहे. बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की संख्या घटकर अब आठ फीसदी और पाकिस्तान में दो फीसदी रह गयी है. घोष ने बांग्लादेश की वर्तमान सरकार की तारीफ करते हुए कहा कि भारत सरकार के मैत्रीपूर्ण और राजनैतिक दबाव के बाद वहां की सरकार ने भी दोस्ताना रवैया अख्तियार किया है. हाल के दिनों में अल्पसंख्यकों पर हुए हमलों के विरोध में मात्र तीन दिनों के अंदर 8.5 हजार से भी अधिक संदिग्धों और 80-90 आतंकियों को गिरफ्तार किया है.
बांग्लादेश सरकार की इस पहल की श्री घोष ने जहां सराहना की वहीं, बांग्लादेश के भगोड़े आतंकियों को बंगाल में शरण देने का आरोप लगाते हुए राज्य की ममता सरकार पर जमकर हमला किया. उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में जो आतंकी घोषित किये जाते हैं, उन्हीं को ममता सरकार के नुमाइंदे अपने घरों में शरण देते हैं. ऐसे कई साक्ष्यों का रहस्योद्घाटन भी हो चुका है. इसके बावजूद ममता की नींद नहीं टूटी है. श्री घोष ने कहा कि दो दिनों के इस अधिवेशन में कई प्रस्तावों पर सहमति बनी है और पार्टी की भावी रणनीति का खाका तैयार किया गया है.
इसके तहत भाजपा के तीन वरिष्ठ नेताओं का एक प्रतिनिधि दल बांग्लादेश जायेगा. इस दल में श्री घोष खुद भी शामिल होंगे. यह दल बांग्लादेश सरकार से मुलाकात कर अल्पसंख्यकों की वास्तविक स्थिति की पूरी रिपोर्ट लेगी और उनकी सुरक्षा की पूरी गारंटी के लिए वहां की सरकार से गुजारिश करेगी. साथ ही वहां की सरकार से ऐसा माहौल तैयार करने की अपील भी करेंगे कि अल्पसंख्यक समुदाय अपना मुल्क छोड़कर भागने को मजबूर न हो. मीडिया के एक सवाल के जवाब में श्री घोष ने कहा कि केंद्र सरकार एक विधेयक लानेवाली है जिसके तहत 2014 के 31 दिसंबर तक बांग्लादेश और पाकिस्तान से भागकर भारत में शरण ले रहे अल्पसंख्यकों को शरणार्थी घोषित कर दिया जायेगा.
