सिलीगुड़ी : समस्याओं की वजह से उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज हमेशा से ही सुर्खियों में रहा है. रोगी सहायता केंद्र को लेकर फिर से एक बार मेडिकल प्रबंधन के खिलाफ लोगों में रोष है. आरोप है कि उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज व अस्पताल के रोगी सहायता केंद्र से किसी भी प्रकार की कोइ सहायता नहीं मिलती है.
इस केंद्र पर कोइ कर्मचारी ही मौजूद नहीं रहता है,जो रोगियों की सहायता करे. रोगी सहायता केंद्र के नाम पर बस काउंटर रह गया है. इस आरोप को उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक ने भी स्वीकार किया है. उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में कुल मिलाकर 38 विभाग हैं. इसके शिशु, प्रसूति, सर्जरी, इएनटी, स्त्री व पुरूष वार्ड, पैथोलॉजी आदि विभाग शामिल हैं. इसके अतिरिक्त प्रशासनिक भवन, मेडिकल अधीक्षक कार्यालय, मेडिकल कॉलेज के प्राध्यापक कार्यालय, उचित मूल्य की दवा दुकान आदि भी है. यहां आये रोगी और उनके परिजनों को विभाग, चिकित्सक व अन्य कई समस्याओं के समाधान के लिये कुछ वर्ष पहले रोगी सहायता केंद्र बनाया गया गया था.
समस्या यह है कि रोगी सहायता काउंटर तो है लेकिन कर्मचारी मौजूद नहीं रहते हैं. काउंटर की भीतर कुछ पोस्टर लगे हैं, शिक्षित लोगों को उन पोस्टरों से कुछ जानकारियां मिल जाती है. लेकिन ग्रामीण लोगों व निम्न तबके के लोगों को परेशान होना पड़ रहा है. मेडिकल कॉलेज के इतने बड़े कैम्पस में अनजान लोगों के लिये किसी विभाग को ढूंढ निकालना पहाड़ चढ़ने जैसा साबित होता है. सिलीगुड़ी से कई राज्यों सहित पड़ोसी देशों की सीमाएं सटी हुयी है. डुआर्स के साथ नेपाल, भूटान व बिहार के किशनगंज आदि से भी रोगी यहां पर इलाज के लिये आते हैं. रोगी सहायता केंद्र के अभाव में दूर से व पहली बार उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज आये रोगियों व उनके परिजनों को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है.
इन्हीं समस्याओं से निपटने के लिये रोगी कल्याण समिति ने दो वर्ष पहले रोगी सहायता केंद्र की स्थापना की थी. इस समस्या को लेकर रोगी कल्याण समिति व मेडिकल कॉलेज प्रबंधन अनभिज्ञ भी नहीं है. सब कुछ जानते हुए भी आज तक प्रबंधन और रोगी कल्याण समिति ने कोई कदम नहीं उठाया है. उल्लेखनीय है कि उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज में रोगी सहायता केंद्र की सुविधा रेड क्रॉस सोसाईटी मुहैया कराती है.उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक डा. निर्मल बेरा ने इस आरोप को स्वीकार किया है. उन्होंने बताया कि इस संबध में रेड क्रॉस सोसाईटी को बताया गया है. इसके अतिरिक्त इस समस्या के समाधान की कोशिश की जा रही है.
