हालांकि पार्टी नेता यह कह रहे हैं कि दोनों के कोलकाता में रहने की वजह से ही वह लोग आज की बैठक में शामिल नहीं हो पाये. यह नेता चाहे जो भी दावा करे, लेकिन वास्तिवक स्थिति यह है कि हाल में संपन्न विधानसभा चुनाव में तृणमूल की भारी जीत के बाद से विरोधी खेमे में खलबली मची हुई है. फारवर्ड ब्लॉक वाम मोरचा के सबसे प्रमुख घटक दलों में शुमार है. कूचबिहार जिले को फारवर्ड ब्लॉक का घाटी माना जाता है. स्वर्गीय कमल गुहा के समय फारवर्ड ब्लॉक की जिले भर में तूती बोलती थी. उनके निधन के बाद उनके पुत्र उदयन गुहा जिले में फारवर्ड ब्लॉक के प्रमुख चेहरा थे. विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले वह फारवर्ड ब्लॉक छोड़कर तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गये. उसके बाद पार्टी जिले भर में पूरी तरह से कमजोर हो गई.
विधानसभा चुनाव परिणाम ने तो जिले भर में फारवर्ड ब्लॉक की कमर ही तोड़ दी. जिले के कुल नौ सीटों में से मात्र एक सीट पर फारवर्ड ब्लॉक की जीत हुई और पार्टी दिग्गज परेश अधिकारी तक चुनाव हार गये. राज्य में दोबारा तृणमूल के सत्ता में आने के बाद से फारवर्ड ब्लॉक में भागमभाग की स्थिति मची हुई है. भारी संख्या में नेता और समर्थक पार्टी छोड़कर तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो रहे हैं. जिला कमेटी की बैठक में जो दो नेता नहीं आये, उनके भी देर सबेर तृणमूल में शामिल होने की अटकलें लगायी जा रही है. हालांकि फारवर्ड ब्लॉक के नेताओं ने इस संभावना से साफ इंकार किया है. इस बीच, पार्टी को बनाये रखने तथा समर्थकों के तृणमूल में जाने से रोकने के लिए जिला कमेटी ने एक नयी रणनीति तैयार की है. तृणमूल कांग्रेस सरकार के खिलाफ विभिन्न मुद्दों को लेकर आंदोलन करने का निर्णय लिया गया है.
जिला सचिव परेश अधिकारी का कहना है कि आने वाले दिनों में विभिन्न मुद्दों को लेकर तृणमूल सरकार के खिलाफ आंदोलन करेंगे. इनमें उत्तर बंगाल में एम्स के तर्ज पर नये अस्पताल बनाने, बाढ़ रोकने के लिए विभिन्न नदियों पर बांध बनाने, उत्तर बंगाल विकास परिषद के गठन आदि की मांग को लेकर वह लोग आंदोलन करेंगे. इसके साथ ही सिलीगुड़ी में पार्टी के शीर्ष नेताओं की एक बैठक भी होगी.
