सिलीगुड़ी. पूरे हिमालय को एक पर्यटन केंद्र के रूप में उभारने के लिये नेपाल टूरिज्म बोर्ड के साथ सिलीगुड़ी, सिक्किम,दार्जिलिंग और भूटान के टूर ऑपरेटरों ने एकसाथ मिलकर कदम बढ़ाया है. एक दर्दनाक भूकंप के बाद नेपाल फिर से उबरने की कोशिश में है और नेपाल जैसे पर्यटन स्थल को फिर से हराभरा बनाने के […]
सिलीगुड़ी. पूरे हिमालय को एक पर्यटन केंद्र के रूप में उभारने के लिये नेपाल टूरिज्म बोर्ड के साथ सिलीगुड़ी, सिक्किम,दार्जिलिंग और भूटान के टूर ऑपरेटरों ने एकसाथ मिलकर कदम बढ़ाया है. एक दर्दनाक भूकंप के बाद नेपाल फिर से उबरने की कोशिश में है और नेपाल जैसे पर्यटन स्थल को फिर से हराभरा बनाने के लिये पर्यटन को बढ़ावा देना जरूरी है.
शनिवार की रात प्रधान नगर इलाके के एक होटल में एक सभा आयोजित की गयी थी. इस सभा में सिलीगुड़ी, दार्जिलिंग, सिक्किम के टूर ऑपरेटर के साथ नेपाल टूरिज्म बोर्ड के सदस्य भी उपस्थित थे. इस सभा में अंतराष्ट्रीय सीमा से उपर उठकर पूरे हिमालय को एक पर्यटन केंद्र के रूप में उभारने पर विशेष जोर दिया गया.
वर्ष 2015 के 25 अप्रैल को नेपाल में प्रकृति ने काफी दर्दनाक कहर ढाया था. आज भी नेपाल के कइ इलाकों में लोग टेंट में रहने को मजबूर हैं. इस भूकंप ने कई पर्यटकों को भी चपेट में लिया था. इस प्राकृतिक हादसे ने नेपाल के पर्यटन को पूरी तरह से झकझोर कर रख दिया. कइ एतिहासिक पर्यटन स्थल जड़ से ऐसे साफ हो गये जैसे वहां कुछ था ही नहीं.
नेपाल इस त्रासदी से उबरने की कोशिश में है. नेपाल टूरिज्म बोर्ड के अधिकारी सूर्य थपालिया ने बताया कि भूकंप के बाद पर्यटन व्यवसाय में काफी कमी आयी है. पर्यटकों के आगमन में भी लगभग 70 प्रतिशत की कमी आयी है. भूकंप के बाद पिछले एक वर्ष में नेपाल में पर्यटकों की संख्या मात्र साढ़े पांच लाख रही. उन्होंने कहा कि अभी भी नेपाल में कई ऐसे पर्यटन स्थल हैं जिन्हें भूकंप से कोई नुकसान नहीं पहुंचा है. नेपाल के पोखरा और आस-पास के इलाके अभी भी पहले की तरह सुरक्षित हैं. सिलीगुड़ी के टूर ऑपरेटर सम्राट सान्याल ने कहा कि हम नेपाल, भूटान को एक साथ मिलाकर पूरे हिमालय को एक पर्यटन केंद्र के रूप में पर्यटकों के समक्ष पेश कर सकते हैं. हमारा लक्ष्य पूर्व हिमालय की संस्कृति, रहन-सहन, भोजन आदि को पूरे विश्व के समक्ष रखना है.