गायों की बांग्लादेश तस्करी का कॉरिडोर बना सिलीगुड़ी

सिलीगुड़ी: भारत में गोमांस पर रोक लगने के इसकी तस्करी का बाजार गरम हो गया है. बड़े ही आराम से सिलीगुड़ी के रास्ते गायों को सीमा पार कर बांग्लादेश पहुंचाया जा रहा है. सब कुछ जानते हुए भी प्रशासन मूकदर्शक है. इतना ही नहीं पुलिस के साथ इन तस्करों की मिलीभगत का एक मामला भी […]

सिलीगुड़ी: भारत में गोमांस पर रोक लगने के इसकी तस्करी का बाजार गरम हो गया है. बड़े ही आराम से सिलीगुड़ी के रास्ते गायों को सीमा पार कर बांग्लादेश पहुंचाया जा रहा है. सब कुछ जानते हुए भी प्रशासन मूकदर्शक है. इतना ही नहीं पुलिस के साथ इन तस्करों की मिलीभगत का एक मामला भी सामने आया है. इस मामले की गहराई तक पहुंचने पर कई राज का खुलासा हुआ है. नाम ना जाहिर करने की शर्त पर सूत्रों ने कई जानकारी दी है. मिली जानकारी के अनुसार गायों की तस्करी में प्रशासन के निचले तबके के अधिकारियों की एक बड़ी भूमिका है.
गरमी के इस मौसम में गायों की तस्करी का बाजार थोड़ा मंदा चल रहा है फिर भी प्रतिदिन 8 से 10 ट्रक पशु सीमा पार पहुंचाये जा रहे हैं. पिछले अप्रैल माह तक करीब 25 से 30 ट्रक रोजाना बांग्लादेश पहुंचाये जाते थे. एक ट्रक में करीब 30 से 35 गाय लदी होती है. सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस कमिश्नरेट से लेकर जलपाईगुड़ी के कई पुलिस थानों का इस मामले से जुड़े होने के आसार नजर आ रहे हैं. पुलिस की मिलीभगत के बगैर इतने बड़े पैमाने पर पशु तस्करी करना असंभव सा लगता है. इस मामले में पांजीपाड़ा के कई तस्करों के नाम सामने आये हैं. ये तस्कर अपने सही नाम का इस्तेमाल ना कर नकली नाम से पहचाने जाते हैं.
कैसे होती हैं साठगांठ
सिलीगुड़ी व जलापईगुड़ी जिले से सटे सीमांत इलाकों से इतनी बड़ी संख्या में गायों की तस्करी की जा रही है और प्रशासन इससे अनभिज्ञ हो, यह कुछ अटपटा सा लगता है. पुलिस के साथ तस्करों की सांठगांठ कराने में पुलिस की गाड़ी चलाने वाले चालकों की बड़ी भूमिका है. पुलिस की गाड़ी चलाने के सरकार की ओर से चालक नियुक्त किये जाते हैं. सभी सरकारी सुविधाओं के साथ इन चालकों को एक अच्छी तनख्वाह भी मिलती है. लेकिन ये सरकारी चालक अन्य चालकों के साथ काम का बंटवारा करते हैं और अपनी आय का कुछ हिस्सा उन्हें भी दिया करते हैं. अब इन निजी चालकों के साथ तस्कर अपनी पैठ बनाते हैं. फिर ये चालक पुलिस अधिकारियों से इन तस्करों की पैरवी कर गाड़ी पार कराने की डील फिक्स करत हैं. सरकारी चालकों की इस तरह की हेराफेरी काफी मंहगी साबित हो रही हैं.
क्या है तस्करी करने का रूट
तस्करी के लिये अधिकांश गाय बिहार से लाये जाते हैं. पुलिस के कई अभियान में जब्त गायों की नस्ल बिहार की पायी गयी है. बिहार के किशनगंज से गायों को बंगाल में प्रवेश कराया जाता है. किशनगंज के निकट पांजीपाड़ा इलाके से इन गायों को बांग्लादेश के लिये रवाना किया जाता है. गायों से लदे यह ट्रक पांजीपाड़ा से रवाना होकर खोरीबाड़ी के रास्ते उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज से होते हुए नौकाघाट पहुंचते हैं. यहां से ट्रक फूलबाड़ी के रास्ते दिनहाटा पहुंचती है. दिनहाटा से इन गायों को सीमापार बांग्लादेश पहुंचाया जाता है. कभी-कभी विधाननगर से बागडोगरा, माटिगाड़ा होते हुए फूलबाड़ी के रास्ते दिनहाटा पहुंचाया जाता है. इन दोनों रूट में कई पुलिस थानों से होकर गुजरने के बाद भी प्रशासन की खामोशी आश्चर्यजनक है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रास्ते में सभी थानों के पेट्रोलिंग वैन को पैसे दिये जाते हैं. इसका एक हिस्सा थाने की भी जाता है. सूत्रों ने आगे कहा कि जब कभी पुलिस के साथ लेनदेन में गड़गड़ी होती है तो दबाव बनाने के लिए तस्करों पर शिकंजा कसा जाता है. पुलिस तस्कारों के खिलाफ अभियान चलाती है. पीछा कर रही पुलिस से बचने के चक्कर में चालक जान हथेली पर रखकर ट्रक हांकते हैं. कभी-कभी दुर्घटना भी होती है.हाल ही में ऐसी ऐसी एक दुर्घटना जलपाईगुड़ी के निकट हुई थी.
क्या कहते हैं जिला पुलिस अधीक्षक
दार्जिलिंग जिला पुलिस अधीक्षक अमित पी. जवालगी ने बताया कि सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस कमिश्नरेट के अलावा जिले के अन्य 14 थानों ने गाय की तस्करी पर पूरी तरह से प्रतिबंध है. पहले भी कुछ अधिकारियों का नाम सामने आया था जिन पर कार्यवाई की गयी थी. उन्होंने दावा किया है कि पूरे उत्तर बंगाल के मुकाबले विधान नगर और फांसीदेवा थाना इलाके में सबसे अधिक गायों को जब्त किया गया है. सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस कमिश्नरेट इलाका जिला अधीक्षक के कार्यक्षेत्र से बाहर है. सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस कमिश्नर से इस संबंध में संपर्क नहीं हो पाया है.

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