सिलीगुड़ी : एक और फरजी पत्रकार को किया पुलिस के हवाले
दो हजार रुपये में बेचे जा रहे हैं प्रेस कार्ड
गाड़ी पर प्रेस लगा कर चलना बना शौक
सिलीगुड़ी जर्नलिस्ट क्लब द्वारा अभियान जारी
सिलीगुड़ी : गाड़ी पर फरजी प्रेस स्टिकी लगाकर घुमना अब आम बात हो गयी है. दो हजार रूपये में जब फरजी प्रेस कार्ड मिलने लगे तो फर्जी फत्रकारों की संख्या क्यों नहीं बढ़ेगी. फरजी पत्रकारों से ट्राफिक पुलिस के अधिकारी और वास्तविक पत्रकार परेशान हो चुके हैं. सोमवार को सिलीगुड़ी जर्नलिस्ट क्लब के सदस्यों एक और फरजी पत्रकार को उसके मोटर साईकिल सहित पुलिस को सौंप दिया.
उस पत्रकार ने स्वयं को ऑल इंडिया क्राइम एंड इनवेस्टिगेशन जर्नलिस्ट एसोसिएशन का पत्रकार बताया. उसने स्वयं स्वीकार किया है कि दो हजार रूपए के एवज में उसे प्रेस कार्ड मुहैया कराया गया है.
सोमवार दोपहर सिलीगुड़ी जर्नलिस्ट क्लब के सामने अमरनाथ साह नामक एक युवक अपनी मोटरसाईकिल लगा कर खड़ा था. जर्नलिस्ट क्लब के कुछ सदस्यों की नजर उस पर पड़ी. आज से पहले उस युवक को किसी ने किसी कार्यक्रम में नहीं देखा. शंका होने पर जर्नलिस्ट क्लब के सदस्यों ने उससे पूछताछ शुरू की.
इस दौरान उसने ऑल इंडिया क्राइम एंड इनवेस्टिगेशन जर्नलिस्ट एसोसिएशन द्वारा प्रदत्त एक कार्ड दिखाया. उसने बताया कि इसी नाम से जुड़ी एक पत्रिका है जिसमें वह एक पत्ररकार के तौर पर काम करता है. पिछले वर्ष 2015 में उसके नाम से एक खबर भी प्रकाशित हुयी है. एक साथ इतने पत्रकारों से खुद को घिरा देखकर वह भौंचक्का रह गया और सबकुछ उगल दिया. उसने बताया कि वह बागडोगरा इलाके का रहने वाला है. फरजी पत्रकार अमरनाथ ने कहा कि उसके पिता का कबाड़ी का व्यवसाय है.
उसी व्यवसाय से वह भी जुड़ा है. बागडोगरा के भूजियापानी निवासी किसी वर्मन नामक ब्यक्ति ने उसे यह प्रेस कार्ड दिया था. इसके एवज में उसने दो हजार रूपये दिये थे. सिलीगुड़ी जर्नलिस्ट क्लब के सदस्यों ने सिलीगुड़ी थाने की पुलिस को मामले की जानकारी दी. मौके पर पहुंच कर पुलिस ने फरजी पत्रकार को गिरफ्त में ले लिया और उसकी मोटरसाईकिल भी जब्त कर ली. जर्नलिस्ट क्लब के सदस्यों ने पुलिस प्रशासन से फरजी पत्रकारों पर विशेष निगरानी रखने के साथ पकड़े जाने पर कड़ी कार्यवायी करने का अनुरोध किया है. इस समय सिलीगुड़ी में फरजी पत्रकारों की कमी नहीं है.
गाड़ी में प्रेस का स्टिकर लगाने के कई फायदे हैं. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि पुलिस रियायत बरतती है. सिलीगुड़ी जर्नलिस्ट क्लब के सदस्य प्रसेनजीत राहा ने बताया कि सिलीगुड़ी में सैकड़ों फरजी पत्रकार हैं. गाड़ी में प्रेस का स्टिकर और पास में कार्ड रखना इनलोगों का शौक है. कुछ लोग इसी का फायदा उठाकर प्रेस कार्ड बांटने का धंधा कर रहे हैं.
दो हजार, पांच हजार रुपये के एवज में प्रेस कार्ड उपलब्ध कराये जा रहे हैं. अखबार व पत्रिका के ऐसे नाम हैं जिन्हें ना कभी देखा गया है और ना ही किसी ने सुना है. दो दिन पहले भी सिलीगुड़ी पुलिस ने एक फरजी पत्रकार को पकड़ा था.
