पुलिस-प्रशासन ने विभिन्न पक्षों के साथ की बैठक
रामकेली में महाप्रभु के आगमन को हो रहे हैं 502 साल
एडीएम मलय मुखर्जी के नेतृत्व में हुई बैठक
मालदा. रामकेली मेला को लेकर पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों ने व्यवसायी संगठन, पंचायत प्रतिनिधियों और संबंधित इलाके के निवासियों के साथ एक बैठक की है. शुक्रवार शाम को इंगलिशबाजार ब्लॉक की महदीपुर ग्राम पंचायत के बारोदुआरी इलाके में यह बैठक अतिरिक्त जिला अधिकारी मलय मुखर्जी (जिला परिषद) और इंगलिशबाजार थाने के आइसी विपुल बनर्जी के नेतृत्व में हुई.
इसमें पीएएचई, दमकल के अधिकारी व ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों के अलावा मालदा मर्चेंट चेंबर ऑफ कॉमर्स के पदाधिकारी भी उपस्थित थे.प्रशासनिक सूत्रों से पता चला है कि इस बार मालदा के रामकेली इलाके में महाप्रभु श्री चैतन्यदेव के आगमन को 502 साल होने जा रहे हैं. श्री चैतन्यधाम, रामकेली में यह मेला आगामी 14 जून को आयोजित होने जा रहा है. मेला तीन दिन चलेगा. इसमें असंख्य भक्तों की भीड़ उमड़ेगी.
भक्तों को कोई समस्या नहीं हो इसके लिए पुलिस और प्रशासन की विशेष नजर रहेगी. भक्तों की सुविधा के लिए पेयजल और मेडिकल कैंप की व्यवस्था की जायेगी. एडीएम मलय मुखर्जी ने बताया कि रामकेली मेला के भलीभांति संचालन के लिए हर जरूरी कदम उठाया जायेगा. पुलिस अधीक्षक प्रसून बनर्जी ने बताया कि भक्तों की सुरक्षा के लिए महदीपुर इलाके में चौबीसों घंटे पुलिस की विशेष मोबाइल वैन तैनात रहेंगी. रात में पुलिस की गश्त बढ़ाने की व्यवस्था की जायेगी. मेले में अतिरक्त पुलिस बल की तैनाती भी की जायेगी.
गौरतलब है कि सन 1515 में 14 जून को, नवद्वीप धाम से वृंदावन धाम जाते समय महाप्रभु श्री चैतन्य देव दो दिन के लिए रामकेली में रुके थे. उस समय बादशाह हुसेन शाह गौड़ के राजा थे. उनके निजी सचिव दवीरखास उर्फ दवीर खान थे. प्रधानमंत्री थे साकर मल्लिक. बाद में ये लोग हिंदू धर्म में धर्मांतरित हो गये. इस कर्मकांड में उनके साथ महाप्रभु मौजूद थे.
श्रीचैतन्य के गौड़ आगमन को लेकर उस समय रामकेली भक्ति में डूब गया था. सिर्फ हिंदू नहीं, श्री चैतन्य के आकर्षण में बहुत से मुसलिम भी हिंदू धर्म में धर्मांतरित हो गये थे. ज्येष्ठ मास की संक्रांति यानी 14 जून को आज भी हर साल धार्मिक आस्थावान लोग रामकेली में उमड़ पड़ते हैं. रामकेली धाम में महाप्रभु के चरणों के निशान मौजूद हैं. इन पादुका-चिह्नों के आसपास विशाल मेला लगता है और तीन दिनों तक लोग भजन-कीर्तन में डूबे रहते हैं.
बैठक में मौजूद मर्चेंट चेंबर ऑफ कॉमर्स के सचिव उज्ज्वल साहा ने बताया कि सरकारी तौर पर रामकेली मेला तीन दिन चलता है. लेकिन गैर सरकारी रूप से मेला सात दिनों तक चलता है. दूर-दराज से बहुत से भक्त, साधु-संत यहां पहुंचते हैं. प्रशासन तो सब तरह की व्यवस्था कर ही रहा है, व्यवसायी समिति की ओर से भी शिविर की व्यवस्था रहेगी.
