सिलीगुड़ी. राज्य में फिर से तृणमूल की सरकार बनने के बाद भी सिलीगुड़ी नगर निगम में विरोधी दल ने हंगामा खड़ा नहीं किया. हांलाकि विरोधी तृणमूल ने वाम मोरचा बोर्ड को घेरने के कोशिश जरूर की, लेकिन बोर्ड की मासिक बैठक से वॉकआउट नहीं किया. इसके अतिरिक्त सिलीगुड़ी नगर निगम के 20 नंबर वार्ड के तृणमूल पार्षद व दार्जिलिंग जिला तृणमूल अध्यक्ष रंजन सरकार निगम की बोर्ड बैठक में उपस्थित नहीं थे.
आज से पहले निगम की बोर्ड बैठक में तृणमूल पार्षदों की जो आक्रामकता दिखती थी, उसमें कुछ कमी जरूर थी. राज्य विधानसभा चुनाव में दार्जिलिंग व मालदा जिले से तृणमूल का सफाया हो गया है. दोनों जिलों के शीर्ष नेतृत्व को तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी ने डांट फटकार लगायी है. सिलीगुड़ी नगर निगम की सत्ता में वाम मोरचा के आने के बाद से ही लगातार बोर्ड बैठक में हंगामा देखा गया. लगातार कई बार निगम के विरोधी दल को बैठक से वॉक आउट करते देखा गया है.
छोटे-छोटे मुद्दों पर तृणमूल को आक्रामक देखा गया. जबकि राज्य विधानसभा चुनाव के बाद पहली बोर्ड बैठक में तृणमूल के सभी वार्ड पार्षद सहमे दिखे. चुनाव परिणाम का असर सबके चेहरे पर दिखा. इसबीच,तृणमूल सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सिलीगुड़ी विधानसभा सीट से पराजित तृणमूल उम्मीदवार बाइचुंग भुटिया ने तृणमूल सुप्रीमो को अपनी हार की रिपोर्ट भी सौंप दी है.
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पार्टी ने सिलीगुड़ी के तृणमूल नेताओं के लिये कुछ खास निर्देश जारी किया है. जिसकी वजह से सिलीगुड़ी में तृणमूल खेमा सहमा हुआ दिख रहा है.
सिलीगुड़ी नगर निगम के 18 नंबर वार्ड के तृणमूल पार्षद निखिल सहनी बीच में ही बैठक छोड़कर निकल गये. पिछले कई बोर्ड बैठक में इन्हें हंगामे के बीच आग में घी डालने का काम करते देखा गया था. एक बोर्ड बैठक में तो किसी मुद्दे पर तृणमूल और वाम मोरचा के बीच शुरू तर्क-वितर्क के बीच उन्हें कागजातों को फाड़कर उड़ाते देखा गया. आज बैठक छोड़कर निकलने संबंधी प्रश्न पर वह कुछ आवश्यक निजी काम की बात कहकर निकल गये. इसके अतिरिक्त आज की बैठक में जिला अध्यक्ष रंजन सरकार उर्फ राणा भी उपस्थित नहीं थे. उनकी अनुपस्तिथि के कारणों का पता नहीं चला.
