हार में ही अपनी जीत देख रहे हैं हर्क बहादुर

सिलीगुड़ी. तृणमूल का समर्थन होने के बाद भी कालिम्पोंग विधानसभा सीट से जाप प्रमुख हर्क बहादुर छेत्री 11 हजार 431 वोटों से पराजित हो गये. अपनी हार के लिये उन्होंने अंतिम क्षणों में रूपये के खेल को मुख्य वजह बताया है. हांलाकि अपनी हार में ही वह जीत देख रहे हैं. उन्हें लगता है कि […]

सिलीगुड़ी. तृणमूल का समर्थन होने के बाद भी कालिम्पोंग विधानसभा सीट से जाप प्रमुख हर्क बहादुर छेत्री 11 हजार 431 वोटों से पराजित हो गये. अपनी हार के लिये उन्होंने अंतिम क्षणों में रूपये के खेल को मुख्य वजह बताया है. हांलाकि अपनी हार में ही वह जीत देख रहे हैं. उन्हें लगता है कि आने वाले दिनों में वह ही पहाड़ पर खासकर कालिम्पोंग में गोजमुमो को चुनौती दे सकते हैं. इसकी वजह यह है कि इस बार के चुनाव में कालिम्पोंग नगरपालिका के 19 वार्डों में उन्हें बढ़त मिली है. इसी आधार पर उन्होंने अगामी नगरपालिका चुनाव में जन आंदोलन पार्टी(जाप) की जीत का दावा किया है.

ऐसे इस बार के चुनाव में उनकी हार के लिए तृणमूल को ही जिम्मेदार माना जा रहा है.रातनीतिक विश्लेषकों और स्वयं जाप नेताओं का भी मानना है कि कालिम्पोंग सीट से हर्क बहादुर छेत्री का नाम तृणमूल उम्मीदवार के रूप में घोषित करना ही तृणमूल सुप्रीमो की गलती थी. तृणमूल से उम्मीदवारी का विपरीत प्रभाव पड़ा. लाभ तो हुआ नहीं,नुकसान ज्यादा हो गया.बहरहाल यहा माना जा रहा है कि आगामी दिनों में जाप और तृणमूल की राज्य सरकार कालिम्पोंग के विकास के लिए एकसाथ काम करेगी.इसका लाभ नगरपालिका चुनाव में हो सकता है.अब आने वाले दिनों में राजनीतिक स्थिति चाहे जो भी हो लेकिन फिलहाल तो हर्क बहादुर को अपनी हार के कारणों को ढूंढना अतिआवश्यक है.

गौरतलब है कि वर्ष 2011 का विधानसभा चुनाव वह काफी बड़े अंतर से जीते थे. उ??? 1 ??? 9 ???? 102नको 1 लाख 9 हजार 102 वोट मिले थे, जबकि इनके प्रमुख प्रतिद्वंदी गोरामुमो उम्मीदवार प्रकाश दहाल मात्र 7 हजार 427 वोट ही हासिल कर सके थे. इस बार वह 11 हजार 431 वोटों से हार गये. तृणमूल समर्थित जाप उम्मीदवार हर्क बहादुर छेत्री को 56 हजार 262 वोट मिले. जबिक गोजमुमो की सरिता राई 67 हजार 693 वोट पाने में सफल रही. इसबीच,विधानसभा चुनाव में नगरपालिका इलाके में जाप के अच्छे प्रदर्शन से उनकी नजर अब कालिम्पोंग नगरपालिका पर जम गयी है. वर्ष के अंत में जिले के दार्जिलिंग, कालिम्पोंग, कर्सियांग और मिरिक नगरपालिका का चुनाव होना है.

हर्क बहादुर छेत्री का दावा है कि कालिम्पोंग नगर पालिका चुनाव में जीत जाप की ही होगी. इस विधानसभा चुनाव में नगरपालिका के 23 में से 19 वार्डों में उन्हें बढ़त मिली है. मात्र चार वार्डों में वे गोजमुमो उम्मीदवार से पीछे रह गये. श्री छेत्री ने कहा कि यदि यह नगर पालिकाचुनाव होता तो उनकी पार्टी बोर्ड बनाती. उनसे मिली जानकारी के अनुसार जीटीए इलाकों में उन्हें काफी कम वोट मिला. फिर भी उन्होंने जीटीए के पांच क्षेत्रों में पैठ जमाने में सफल रहे. गोजमुमो पर वोट खरीदने का आरोप लगाते हुए श्री छेत्री ने कहा कि मतदान से ठीक पहले ग्रामीण इलाकों में रूपये पानी की तरह बहाए गए. गोजमुमो के पास जनशक्ति नहीं बल्कि धनशक्ति हमसे कहीं ज्यादा है. उन्होंने कहा कि नगरपालिका के जिन चार वार्डों में वे पीछे रह गये, वह अत्यंत ही गरीब ग्रामीण इलाका है. यहां बसने वाले नागरिकों के लिये सौ रूपए बहुत बड़ी रकम होती है. जबकि रूपये तो हजारों में बांटे गए हैं. शहरी इलाके के लोगों से वोट खरीदना इतना आसान नहीं है. उन्होंने कहा कि जाप राज्य सरकार के साथ मिलकर कालिंपोंग का विकास करेगी. पेयजल की समस्या को लेकर जाप कार्यकर्ताओं का पिछले तीन दिनों से धरना प्रदर्शन जारी है, जो आगामी 30 मई तक जारी रहेगी.

हर्क बहादुर का नगरपालिका के 19 वार्डों में बढ़त हासिल करना और जीटीए के पांच इलाके में पैठ जमाना गोजमुमो के लिए मुसीबत का सबब बन सकता है. नगरपालिका चुनाव अब गोजमुमो के लिये इतना आसान नहीं होगा.
रोशन गिरि ने दावे को किया खारिज
इस संबध में गोरखा जनमुक्ति मोरचा के उपाध्यक्ष रोशन गिरि का कहना है कि हर्क बहादुर को जनता ने वोट नहीं दिया है. उन्हें तृणमूल, जीएनएलएफ और अन्य क्षेत्रीय संगठनो की वजह से वोट मिला है. फिर भी वे गोजमुमो से कोसों दूर ही रह गये. रूपये के वदले वोट खरीदने का जो आरोप उन्होंने गोजमुमो पर लगाया है, वह सही नहीं है.दरअसल रूपया का सारा खेल उन्होंने ने ही रचा था. गोजमुमो को परास्त करने के लिये उन्होंने साम, दाम, दंड और भेद सभी पैतरे अपनाये, लेकिन हाथ कुछ भी नहीं आया. नगरपालिका चुनाव के संबध में श्री गिरि ने कहा कि प्रत्येक चुनाव का अलग मुद्दा होता है. विधानसभा में बढ़त मिलने का कतई मतलब नहीं कि जाप का नगरपालिका पर कब्जा हो गया है. आगामी दिनों में गोजमुमो अपने संगठन को लेकर आगे काम करेगी.

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