मालदा: विधानसभा चुनाव में बुरी तरह से हार के बाद एक रिपोर्ट लेकर जिला तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष मोअज्जम हुसैन कोलकाता में हैं. पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार वह मंगलवार को यह रिपोर्ट मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सौंपेंगे. मोअज्जम हुसैन ने बताया है कि शनिवार 21 मई को उनकी मुलाकात ममता बनर्जी से हुई थी. मुख्यमंत्री ने उनसे सही तरीके से ही बात की है. चुनाव परिणाम को लेकर जब वह कुछ कहना चाह रहे थे तो उन्होंने 24 मई को कालीघाट आने के लिए कहा. इसीलिए वह कोलकाता गये हैं. वह कल मंगलवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को 12 विधानसभा केन्द्रों में पार्टी की हार को लेकर तैयार एक रिपोर्ट सौंपेंगे.
इस बीच, मोअज्जम हुसैन को जिला तृणमूल अध्यक्ष पद से हटाने के लिए कई नेता और समर्थक यहां सक्रिय हो गये हैं. इन लोगों का कहना है कि मुअज्जम हुसैन के नेतृत्व में पार्टी यहां कभी भी उठ कर खड़ा नहीं हो सकेगी. लोकसभा चुनाव के बाद विधानसभा चुनाव में भी जिले में पार्टी की करारी हार हुई है.
मुअज्जम हुसैन लोकसभा के बाद विधानसभा का चुनाव भी हार गये हैं. वह सिर्फ हारे ही नहीं, बल्कि तीसरे स्थान पर रहे हैं. कई नेताओं का कहना है कि मोअज्जम हुसैन को स्वयं की अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिहए. यही उनके लिए सम्मानजनक रहेगा. अन्यथा 30 मई को ममता बनर्जी इस्तीफा देने के लिए कह सकती हैं. इस बीच, 28 अथवा 29 तारीख को जिला पर्यवेक्षक शुभेन्दु अधिकारी भी यहां आ सकते हैं. हार के कारणों पर विचार करने के लिए वह यहां एक बैठक भी कर सकते हैं. इधर, मुअज्जम हुसैन का दावा है कि इस्तीफा देने का उन पर कोई दबाव नहीं है. सोमवार को उन्होंने फोन पर बताया कि वह 20 मई से ही कोलकाता में हैं. मुख्यमंत्री सहित कई नेताओं से उनकी मुलाकात हो चुकी है और सभी ने उनके साथ सही तरीके से बातचीत की है. किसी ने भी इस्तीफा देने के लिए नहीं कहा है.
कृष्णेंदु तथा सावित्री को लपेटने की तैयारी
पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मोअज्जम हुसैन अपने पद को बचाने की जीतोड़ कोशिश कर रहे हैं. वह इस हार की पूरी जिम्मेदारी पूर्व मंत्री कृष्णेन्दु चौधरी तथा सावित्री मित्रा पर डालने वाले हैं. यही वजह है कि वह पहले ही कोलकाता पहुंच गये हैं. पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, 24 मई को ममता बनर्जी मुअज्जम हुसैन के साथ ही मुर्शिदाबाद के जिला अध्यक्ष मन्नान हुसैन के साथ भी अपने कालीघाट आवास पर बातचीत करेंगी. ऐसे कई नेताओं का कहना है कि मोअज्जम हुसैन इस बार अपनी कुर्सी नहीं बचा पायेंगे. तृणमूल को यहां नये चेहरे की जरूरत है. इस बार उनका जाना तय है.
