माकपा के दिलीप सिंह को दूसरी बार दी मात
तीसरे स्थान पर रहे भाजपा के रथींद्र बोस
माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी से कांग्रेस के शंकर मालाकार जीते
सिलीगुड़ी. राज्य के निवर्तमान उत्तर बंगाल विकास मंत्री तथा डाबग्राम-फूलबाड़ी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे गौतम देव लगातार दूसरी बार विधानसभा पहुंचने में कामयाब रहे हैं. उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी कांग्रेस समर्थक माकपा उम्मीदवार दिलीप सिंह को करीब 25 हजार मतों से पराजित किया. गौतम देव ने इस विधानसभा सीट से लगातार दूसरी बार दिलीप सिंह को पटकनी दी है. वर्ष 2011 के चुनाव में भी उन्होंने इस सीट से दिलीप सिंह को हराया था.
इस बार के चुनाव में गौतम देव जहां एक लाख पांच हजार 769 वोट पाने में कामयाब रहे, वहीं दिलीप सिंह को मात्र 81 हजार 958 वोट से ही संतोष करना पड़ा. भाजपा के रथीन्द्र बोस यहां तीसरे स्थान पर रहे हैं. रथीन्द्र बोस 26 हजार 195 वोट पाने में कामयाब रहे. इसके अलावा निर्दलीय उम्मीदवार सुबास विश्वास को 2180, बसपा उम्मीदवार संजीवन सरकार को 1409, एसयूसीआईसी के अबुल कासिम को 1017 तथा आमरा बंगाली के दुलाल सरकार को 914 मत मिले हैं. यहां 32 सौ 83 उम्मीदवारों ने नोटा पर भी बटन दबाया है. इधर, सिलीगुड़ी महकमा के माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी सीट पर गठबंधन उम्मीदवार कांग्रेस के शंकर मालाकार ने कब्जा कर लिया है. उन्होंने तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार अमर सिन्हा को करीब 19 हजार मतों से पटकनी दी.
दोनों ही उम्मीदवारों के बीच यहां कड़ा मुकाबला हुआ. आखिरकार शंकर मालाकार को यहां से जीत हासिल करने में सफलता मिली. शंकर मालाकार जहां 86 हजार 441 मत पाने में कामयाब रहे, वहीं तृणमूल कांग्रेस के अमर सिन्हा को 67 हजार 814 मतों से ही संतोष करना पड़ा. भारतीय जनता पार्टी के आनंदमय वर्मन 44 हजार 625 वोट लेकर तीसरे स्थान पर रहे. इन तीन प्रमुख उम्मीदवारों के अलावा चार और उम्मीदवार भी यहां मैदान में थे. इनमें से केपीपीयू के बिदूर वर्मन 2464, बसपा के सुदीप मंडल 1849 वोट पाने में कामयाब रहे.
गौतम कीर्तनिया को मात्र 1739 वोटः माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी विधानसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस के बागी नेता तथा निर्दलीय चुनाव लड़ रहे गौतम कीर्तनिया को मात्र 1739 वोटों से ही संतोष करना पड़ा. विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने की वजह से उन्होंने काफी हंगामा किया था.
उत्तर बंगाल में पार्टी के कोर कमेटी के अध्यक्ष गौतम देव के मनाने के बाद भी वे नहीं माने थे और निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अपना परचा दाखिल कर दिया था. बाद में तृणमूल कांग्रेस ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया था. आज विधानसभा चुनाव परिणाम की घोषणा होने के बाद उनका विधायक बनने का सपना टूट गया है. वह मात्र 1739 वोट लेने में ही कामयाब रहे हैं.
