मालदा में भी नाव यात्रियों की जिंदगी से खिलवाड़

मालदा: कालना में गंगाघाट पर नाव डूबने की घटना के बाद भी मालदा के नाववाले नहीं चेते हैं. यहां भी कोई बड़ी दुर्घटना कभी भी घट सकती है. मालदा जिले की विभिन्न नदियों में क्षमता से अधिक संख्या में लोगों को नाव से ढोया जा रहा है. पैसे के लालच में नाववाले आम लोगों की […]

मालदा: कालना में गंगाघाट पर नाव डूबने की घटना के बाद भी मालदा के नाववाले नहीं चेते हैं. यहां भी कोई बड़ी दुर्घटना कभी भी घट सकती है. मालदा जिले की विभिन्न नदियों में क्षमता से अधिक संख्या में लोगों को नाव से ढोया जा रहा है. पैसे के लालच में नाववाले आम लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं. इस इलाके में कई गांवों के लोगों के साथ ही स्कूल-कॉलजे के विद्यार्थी नौका की सवारी करते हैं. आरोप है कि प्रशासन इस मामले में पूरी तरह से उदासीन है.

प्रशासन को ठेंगा दिखाकर गंगा, फुलहर, भागीरथी, महानंदा, पुनर्भवा, कालिंदी, टांगन आदि नदियों में नाववाले अधिक संख्या में यात्रियों को बिठा रहे हैं. नाववालों की इन गतिविधियों से यहां के ग्रामीण भी काफी नाराज हैं. इन लोगों का आरोप है कि कुछ दिन पहले ही वर्धमान के कालना में नाव डूबने से 20 लोगों की मौत हो गयी है.

अतिरिक्त यात्री बिठाने की वजह से ही यह हादसा हुआ था. इसके बाद भी मालदा में नौका माफिया के लोग नहीं चेते हैं. स्थानीय लोगों ने प्रशासन से नावों पर नजर रखने की मांग की है. उल्लेखनीय है कि कालना में जो नाव डूब गयी है उसमें 70 यात्री ही बैठ सकते थे, लेकिन नाववालों ने 100 से भी अधिक लोगों को बिठा लिया था जिसकी वजह से नाव बीच से ही फट गयी और 20 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी. मालदा के मानिकचक और कालियाचक दो ब्लॉकों के गंगा नदी में कई फेरीघाट हैं. हर दिन ही इन फेरीघाटों से भारी संख्या में लोग आवाजाही करते हैं. इसी तरह की स्थिति भागीरथी, महानंदा, कालिंदी, पुनर्भवा तथा अन्य नदियों की है.

कुछ लोगों का यह भी कहना है कि सिर्फ नौकावाले ही नहीं, बल्कि आम लोग भी दुर्घटना के लिए जिम्मेदार हैं. जल्दी गंतव्य तक पहुंचने के लिए लोग क्षमता से अधिक संख्या में नावों पर बैठ जाते हैं. नाववाले भी इनको रोकने की कोशिश नहीं करते. मशीन से चलनेवाली कई नावों में तो गाय-भैंस सहित अन्य पशुओं को भी लाद लिया जाता है. कई नावों में यात्रियों के साथ ही पत्थर भी लाद लिये जाते हैं. वर्ष 2015 के मार्च में मानिकचक थाना अंतर्गत भूतनी इलाके में गंगा में एक नाव डूब गयी थी. तब तीन लोग इस हादसे में मारे गये थे.

कई लोग तैरकर किसी तरह जान बचाने में कामयाब हुए थे. इसी तरह से हरिश्चंद्रपुर की भागीरथी नदी तथा कालियाचक में गंगा नदी में नाव डूबने की घटना घटी थी. यात्रियों का आरोप है कि फेरीघाट में काफी पुरानी नावें पंपिंग सेट की मदद से चलायी जा रही हैं. समय पर पहुंचने की जल्दीबाजी की वजह से आम लोग भी अपना जीवन जोखिम में डाल रहे हैं. यही वजह है कि इन फेरीघाटों में नदी पार करने के लिए हमेशा ही भीड़ लगी रहती है. यात्रियों का कहना है कि जान का जोखिम होने के बाद भी कोई दूसरा चारा नहीं है. यातायात के अन्य साधन उपलब्ध नहीं हैं.

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