तृणमूल से बहिष्कृत चार पंचायत सदस्य माकपा में लौटे

सिलीगुड़ी. तृणमूल से बहिष्कृत चार पंचायत सदस्य रविवार को वापस माकपा में शामिल हो गये. यह घटना राजनीतिक महलों में चर्चा का विषय बन गया है. माकपा पर अब सवाल खड़े होने लगे हैं कि जिन चार पंचायत सदस्य पर तृणमूल ने वसूली, सरकारी जमीन पर दखल कर अवैध रूप से बिक्री करने का आरोप […]

सिलीगुड़ी. तृणमूल से बहिष्कृत चार पंचायत सदस्य रविवार को वापस माकपा में शामिल हो गये. यह घटना राजनीतिक महलों में चर्चा का विषय बन गया है. माकपा पर अब सवाल खड़े होने लगे हैं कि जिन चार पंचायत सदस्य पर तृणमूल ने वसूली, सरकारी जमीन पर दखल कर अवैध रूप से बिक्री करने का आरोप लगाकर पार्टी से निकाल दिया, उसके दूसरे दिन ही माकपा ने इन चारों को पार्टी में शामिल कर लिया. माकपा ने इन चार पंचायत सदस्यों देवेश मंडल, अटल दास, द्रौपदी सरकार, उत्तम सरकार पर लगे आरोपों को निराधार करार दिया. उनका कहना है कि तृणमूल नेताओं देवाशिष प्रमाणिक और दिलीप राय ने अपना दोष इन चारों के मत्थे मढ़ने की कोशिश की है.
रविवार की शाम फूलबाड़ी-2 नंबर ग्राम पंचायत इलाके में आयोजित एक कार्यक्रम में सीटू नेता व न्यू जलपाईगुड़ी-फूलबाड़ी के माकपा नेता दीवेश चौबे ने माकपा का झंडा थमाकर इन चारों का फिर से पार्टी में स्वागत किया. मिली जानकारी के अनुसार ये चारों पंचायत सदस्य आज से करीब दो वर्ष पहले माकपा के ही सदस्य थे. बीच में किसी कारणवश तृणमूल में शामिल हो गये थे. वर्ष 2015 के सिलीगुड़ी महकमा चुनाव में ये चारों तृणमूल की ओर से चुनाव जीत कर पंचायत सदस्य भी बने.
बीते शनिवार को तृणमूल ने इन चारों को पार्टी से निकाल दिया. तृणमूल की ओर से बताया गया कि ये चारों पंचायत सदस्य तृणमूल का डंका पीटकर बाजार से वसूली, सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा और अवैध रूप से सरकारी जमीनों की बिक्री जैसे काम करते थे. पार्टी की छवि को बचाने के लिए तृणमूल ने इन चारों का बहिष्कार करने का निर्णय लिया.
माकपा नेता दीवेश चौबे ने कहा कि तृणमूल ने इन चारों को नहीं हटाया, बल्कि इन चारों ने तृणमूल को छोड़ दिया. गत आठ मई को ही इन चारों ने तृणमूल पार्टी से अपना इस्तीफा दे दिया. श्री चौबे ने बताया कि इलाके के तृणमूल नेता देवाशिष प्रमाणिक और दिलीप राय यहां सिंडीकेट राज चला रहे हैं. वसूली, सरकारी जमीन की अवैध बिक्री और जबरन दखल का जो इल्जाम इन चारों पर लगाया गया है, वह सरासर निराधार है.

सच्चाई यह है कि देवाशिष और दिलीप दोनों मिलकर इलाके की सरकारी जमीन को अवैध रूप से बेच रहे हैं. यहां तक कि इन लोगों ने कब्रगाह जैसे पवित्र स्थान को भी नहीं छोड़ा. महानंदा के किनारे तक को बेच डाला.

उन्होंने बताया कि इन चारों पंचायत सदस्यों ने इस विधानसभा चुनाव में तृणमूल का होकर प्रचार नहीं किया था. ये चारों देवाशिष और दिलीप के अत्यातार से तंग थे. दिलीप और देवाशिष पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि ये दोनों पंचायत सदस्यों के लोकतांत्रिक अधिकार पर कब्जा कर चुके थे. दिलीप पंचायत सदस्य ना होने के बाद भी कार्यालय में पंचायत की कुरसी पर बैठता है. पंचायत तो नाम की है, राज तो दिलीप का चलता है. अपने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए ये चारों पंचायत सदस्य तृणमूल छोड़कर माकपा में लौट आये.

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