इसे लेकर न्यू ग्लोन चाय बागान अंचल के दीवाल लेन की रहने वाली आदीवासी महिला हेमंती खुजुर का कहना है कि सुबह सात बजे से लेकर शाम तीन बजे तक बागान में पत्तियां तोड़ती हूं. इस दौरान तकरीबन 60 से 75 किलो चाय की पत्ती रोज तोड़ना पड़ता है. इसके बदले उन्हें सिर्फ 122 रुपये रोजाना के हिसाब से मजदूरी मिलती हैं. मंहगायी की इस घड़ी में पति की मौत के बाद इसी 122 रुपये में तीन बच्चों व सास ससुर का पेट पालना पड़ता है.
कम मजदूरी मिलने को लेकर मालबाजार क्षेत्र के लंकापाड़ा की रहने वाली बिंदिया महाली का कहना है कि वह खुद की जमीन पर चाय की खेती करती है. वहां से चाय की पत्तियां तोड़कर बाहर कारखाने के मालिकों को बेचती हूं उनका कहना है कि प्रति किलो सिर्फ 16 से 20 रुपये की दर से उन्हें रुपये मिलते है. मंहगायी की इस घड़ी में यह रकम काफी कम है. लिहाजा इस बार के चुनाव में जो भी उम्मीदवार उनका हक दिलाने के लिए आगे आयेगा, जरूरत पड़ने पर सरकार से हक के लिए लड़ने को भी तैयार रहेगा, वह अपनी कीमती वोट उसी उम्मीदवार को देना पसंद करेंगी.
