सिलीगुड़ी: चुनाव के इस मौसम में सभी लोग चुनावी पंडित हो जाते हैं. आपने चुनाव से संबंधित कोई बात छेड़ी नहीं कि सामने वाला शुरू हो जाता है़ वह आपको इतनी सारी जानकारियां और एक्सपर्ट कमेंट उपलब्ध करा देगा कि आपको लगेगा कि इनके आगे आप ही बेवकूफ हैं.
मैं आज पहाड़ पर चुनावी चरचा करने के मूड में था़ पिछली बार भी मैं दार्जिलिंग की ओर तीनधरिया जाने तक के लिए घर से निकला था,लेकिन वाहन के अभाव में जा नहीं पाया था़ आपको बस पर आमलोगों से चुनाव की चरचा करनी है,इसलिए आप अपनी गाड़ी लेकर जा नहीं सकते़ पिछली बार मेरे साथ ऐसा ही हुआ था़ वाहन नहीं मिलने की वजह से मैं पहाड़ पर नहीं जा सका़ तब मैं डुवार्स के लिए निकल गया था़.
इस बार मैं किसी भी शर्त पहाड़ जाना चाह रहा था़ मैं बस स्टैंड पर बस का इंतजार करने लगा़ काफी देर तक खड़े रहने के बाद भी बस आयी नहीं. मैं प्राइवेट स्टैंड की ओर निकल गया़ यहां एक टाटा सूमो में सवार हो गया़ टाटा सूमो में 11 लोग आ जाते हैं. मेरे लिए इतना ही काफी था़ बीच वाली सीट मैनें ली ताकि अगल बगल वाले से बातचीत कर सकूं. खैर मेरी गाड़ी दिन के करीब 11 बजे दार्जिलिंग के लिए रवाना हो गयी़ सिलीगुड़ी से आगे बढ़ते ही मैनें पास वाले भाइ साहब को कुरेदा़ मैने पूछ लिया-भाइ साहब इस बार चुनाव में पहाड़ पर आपको क्या दिख रहा है? वह बोले कोइ आइडिया नहीं कोलकाता से दार्जिलिंग परिवार के साथ घुमने जा रहा हूं,वहां का कुछ पूछिए तो बता दूंगा़ जा मेरा तो पहला निशाना ही चुक गया़ अब क्या करें.
मैं सोच ही रहा था कि सामने की सीट पर बैठे साहब ज्ञानी निकले़ उन्होंने ही बगैर कुछ पूछे की कह दिया,पहाड़ पर इस बार विमल गुरूंग का पसीना निकल जायेगा़ तीनों सीटों पर जी मुश्किल होगा़ चला था दीदी से टक्कर लेने़ इस बार देखिए चुनाव के बाद पहाड़ छोड़कर भागना नहीं पड़ा तो कहिएगा़ मेरा मन प्रसन्न हो गया़ भाइ साहब ने यह जवाब देकर मेरा काम आसान कर दिया था़ चरचा शुरू हुयी कि एक दो और लोग इसमें कुद पड़े.मुझे कुछ नहीं बोलना पड़ रहा था़ सभी लोग आपस में ही बोलने लगे थे़ फिर भी पसीना छोड़ाने की बात करने वाले भाइ साहब से मैने उनका नाम पूछ लिया़ उनका नाम छोटन कर्मकार था़ वह सिलीगुड़ी के चंपासारी के रहने वाले थे़ उन्होंने कहा विमल गुरूंग बंगला भाग (बंगाल का बंटवारा) करवाना चाहता है जो कभी नहीं होगा़
ममता बनर्जी निकाल दिया ना हवा़ पहले तो बहुत चिल्लाते थे गोरखालैंड लेंगे,गोरखालैंड लेंगे़ बार-बार बंद बुला देते थे़ अब बंद काहे नहीं बुलाते हैं. दीदी ने जंगलमहल शांत किया और पहाड़ को भी़ विमल गुरूंग और गोजमुमो की इस बार करारी हार होगी़ तीनों सीट पर तृणमूल और जाप जीतेगा़ देखते नहीं हैं ममता ने पहाड़ पर कितना डेवलपमेंट बोर्ड बना दिया़ इस जाति का लोग तो तृणमूल को ही वोट देगा़उनकी बातों के साथ अन्य यात्री भी हां में हां मिला रहे थे़ मैने सोचा चक्कर क्या है,सब विमल गुरूंग के विरोध में बोल रहा है़ मैने सभी यात्रियों को देखा़ इसमें से पहाड़ के रहने वाले कोइ नहीं थे़ सभी सिलीगुड़ी के रहने वाले थे और किसी ना किसी काम से दार्जिलंग जा रहे थे़ मेरा इस जीप में आना बेकार लगने लगा़ पहाड़ का मन जानने के लिए जरूरी था कि हम पहाड़ के लोगों से बातचीत करें.
इसी क्रम में हमारी जीप पंखाबाड़ी आ गयी़ ड्राइवर ने चायपान के लिए जीप रोक दी़ मैने सोचा चलो यहीं उतर जाते हैं. ड्राइवर को मै बोला कि मैं और आगे नहीं जा सकता़ उसने भी हामी भर दी़ मैं पंखाबाड़ी में एक दो लोगों से बातचीत करने निकल गया़ वहीं पदम लामा नामक एक ब्यक्ति से बात शुरू की़ मैने पूछा कि इस बार चुनाव में विमल गुरूंग की पार्टी की हालत खराब है? उन्होंने कहा कोइ हालत खराब नहीं है़ तीनों सीट पर हमलोग जीत रहे हैं.
चुनाव के बाद पहाड़ से तृणमूल और जाप का सफाया हो जायेगा़ ममता बनर्जी बोर्ड बना कर चाहे गोरखा जाति को बांटने की कितनी भी कोशिश कर लें.सभी गोरखा एक हैं और अलग गोरखालैंड राज्य को बनने से कोइ नहीं रोक सकता़ पास बैठी एक महिला ने बताया कि जाप नेता हर्क बहादुर तृणमूल की कठपुतली बन गये हैं. जिस पार्टी ने उन्हें विधायक बनाया,उसी पार्टी को धोखा दे गए़ उन्होंने गोरखा जाति के साथ धोखाधड़ी की है़ मैने कहा कि जाप और तृणमूल उम्मीदवारों को तो गोरामुमो ने भी समर्थन किया है़ इससे क्या हुआ़ हमारे पास भी तो भाजपा का समर्थन है़ इसके अलावा सीपीएम और कांग्रेस का भी साथ हमें हासिल है़ बातचीत चल रही थीऔर इसमें लोगों की भागीदारी भी बढ़ रही थी़ इसी दौरान एक ब्यक्ति ने जो कहा उसी में मुझे पहाड़ की सच्ची चुनावी तस्वीर दिखी़ उस ब्यक्ति ने कहा कि भाइ साहब जीत तो गोजमुमो की ही होगी,भले ही मार्जिन कम हो जाये़.
