एक बार फिर से बंगाल के विभाजन की कोशिश शुरू हो गयी है. गोरखालैंड का नाम लिये बगैर उन्होंने कहा कि वह किसी भी कीमत पर राज्य का विभाजन नहीं होने देंगी. पहले पहाड़ तथा तराई डुवार्स में अलग राज्य के नाम पर हिंसा का दौर जारी था. वह जब सत्ता में आयी तो हिंसा का दौर सबसे पहले खत्म किया. अभी पहाड़ तथा डुवार्स में शांति है. वह किसी भी कीमत पर हिंसा तथा अशांति बर्दाश्त नहीं करेंगी. ममता बनर्जी ने अपने उम्मीदवारों की जीत दिलाने की अपील मतदाताओं से की. उन्होंने कहा कि मुझे देखकर तृणमूल उम्मीदवारों को वोट दें.
वह जब तक सत्ता में रहेंगी, राज्य का विकास जारी रखेंगी. इसके साथ ही पहाड़ तथा डुवार्स में भी शांति बनी रहेगी. जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने माकपा तथा कांग्रेस गंठबंधन पर भी जोरदार हमला बोला. उन्होंने कहा कि आने वाले विधानसभा चुनाव में गंठबंधन करने से भी माकपा और कांग्रेस को कोई लाभ नहीं होने वाला है. राज्य के लोगों ने माकपा के 34 साल के शासन का अंत तक इस पार्टी को दूर खदेड़ दिया है. फिर से उनकी वापसी की कोई संभावना नहीं है. यही स्थिति कांग्रेस की भी है. उन्होंने कांग्रेस नेता देव प्रसाद राय की जमकर प्रशंसा की. देव प्रसाद राय कांग्रेस तथा माकपा के गंठबंधन का विरोध कर रहे हैं. वह इस बार इसी गंठबंधन का विरोध करते हुए वह चुनाव भी नहीं लड़ रहे हैं.
ममता बनर्जी ने कहा कि देव प्रसाद राय जैसे कांग्रेस के काफी नेता एवं समर्थक हैं, जो गंठबंधन का विरोध कर रहे हैं. डुवार्स में चाय बागानों की समस्या को लेकर भी ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्र सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि चाय बागानों की स्थिति सुधारने के लिए केंद्र सरकार कुछ भी नहीं कर रही है. राज्य सरकार ने ही चाय श्रमिकों की मदद की है.
वह डुवार्स के बंद चाय बागान के श्रमिकों को 47 पैसे किलो की दर से प्रति महीने 45 किलो चावल दे रही हैं. यदि फिर से तृणमूल की सरकार बनती है, तो वह चाय बागानों के लिए और भी अधिक काम करेंगी. उन्होंने सात चाय बागानों का अधिग्रहण किया है. दूसरी ओर केंद्र में मोदी सरकार चाय बागानों के लिए कुछ भी नहीं कर रही है.
