सिलीगुड़ी. कोलकाता उच्च न्यायालय ने सिलीगुड़ी जलपाईगुड़ी विकास प्राधिकरण (एसजेडीए) की वर्ष 2012 की नियुक्ती प्रक्रिया को गैरकानूनी करार दिया है. अब उसे पूरी नियुक्ति प्रक्रिया म्यूनिसपल सर्विस कमीशन के जरिये करानी होगी.
वर्ष 2012 में एसजेडीए ने 27 पदों पर नियुक्ति के लिए सूचना जारी की थी. इसके बाद एसजेडीए के सब इंजीनियर, असिसटेंट लैंड मैनेजर, असिस्टेंट प्लानर, कंप्यूटर असिस्टेंट आदि रिक्त पदों पर आवेदकों ने आवेदन किया एवं इन पदों के लिये लिखित परीक्षा भी ले ली गयी.
लिखित परीक्षा में पास परीक्षार्थियों से साक्षात्कार कर पदों पर नियुक्त किया जाना था कि राज्य सरकार ने कैबिनेट बैठक में लिये गये एक फैसले के आधार पर पश्चिम बंगाल टाउन एंड कंट्री प्लानिंग एक्ट-1979 के तहत एक नोटिफिकेशन जारी किया, जिसमें राज्य का कहना है कि किसी भी विकास प्राधिकरण द्वारा नियुक्ति की प्रक्रिया के लिये नोटिफिकेशन जारी करना होगा. जबकि एसजेडीए के यूडी विभाग की ओर से नहीं किया गया. राज्य के नोटिफिकेशन के आधार पर उच्च न्यायालय ने यह इस नियुक्ती प्रक्रिया को गलत बताया है. अदालत का कहना है कि सभी नियुक्तियां नोटिफिकेशन के माध्यम से होनी चाहिए. इस विषय पर एसजोडीए के चेयरमैन एवं उत्तर बंगाल विकास मंत्री गौतम देव ने बताया कि नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने के समय राज्य सरकार की ओर नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया था.
लिखित परीक्षा लेने के बाद नोटिफिकेशन जारी हुआ. इस वजह से राज्य सरकार का इस विषय पर ध्यान आकर्षित करते हुए विशेष छूट के लिये आवेदन किया गया था. लेकिन नोटिफिकेशन जारी होने के बाद इस विषय पर कैबिनेट को ही अंतिम फैसला लेना था. इसके बाद उच्च न्यायालय के निर्देश के मुताबिक नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लगा दी गयी है. अब म्यूनिसपल सर्विस कमिशन की निर्देशिका के तहत नियुक्ती की जायेगी.
