सभाधिपति तापस सरकार ने कहा कि वह महकमा परिषद इलाके में आम लोगों की राय लेकर ही आगे का काम करना चाहते हैं. ग्रामीण इलाकों में विकास का काम वहां के लोगों से पूछ कर किया जायेगा. उनकी योजना विभिन्न गांवों में जाकर वहां के लोगों से बातचीत कर विकास कार्य शुरू करने की है. वह विभिन्न गांवों में जायेंगे और वहां के लोगों से पूछेंगे कि उन्हें क्या चाहिए. उसके बाद प्राथमिकता के आधार पर कार्यों की शुरूआत की जायेगी. श्री सरकार ने कहा कि महकमा परिषद की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है.
राज्य सरकार की ओर से कोई मदद नहीं मिल रही है. इसके अलावा केन्द्र सरकार की योजनाओं की धनराशि भी देरी से मिल रही है. सीमित संसाधनों में ही उनको काम करना है. ऐसी परिस्थिति में वह आर्थिक स्रोत बढ़ाने पर विशेष जोर दे रहे हैं. आज के इस सेमिनार में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ भी उपस्थित थे. सेमिनार को संबोधित करते हुए रवीन्द्र भारती विश्वविद्यालय के राजनीति शास्त्र विभाग के प्रमुख विश्वनाथ चक्रवर्ती ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में विकास को लेकर बने अब तक के मास्टर प्लान फेल हो चुके हैं. यदि सिलीगुड़ी महकमा परिषद मास्टर प्लान को बनाकर उसे कार्यरूप करने में सफल रहा, तो यह बड़ा उदाहरण होगा. सिलीगुड़ी महकमा परिषद पूरे राज्य को एक नयी दिशा दिखायेगा.
श्री चक्रवर्ती ने आगे कहा कि ग्रामीण इलाकों में योजनाओं को लागू कर पाना अकेले महकमा परिषद से संभव नहीं है. इसके लिए ग्राम पंचायत, पंचायत समिति तथा महकमा परिषद को मिलकर काम करना होगा. ग्राम पंचायतें योजना बनायेगी और उसे पंचायत समितियों को सौंपेगी. पंचायत समिति भी योजना बनाकर उसे महकमा परिषद को सौंपेगी. इस तरह से काम करने पर विकास की हवा ग्राम पंचायतों तक पहुंचेगी. इस अवसर पर दार्जिलिंग के जिला शासक अनुराग श्रीवास्तव के अलावा विभिन्न स्वयंसेवी तथा व्यावसायिक संगठनों के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे.
