ममता पर लगाया दोषियों को बचाने का आरोप
सिलीगुड़ी : सिलीगुड़ी-जलपाईगुड़ी विकास प्राधिकरण (एसजेडीए) में कथित घोटाले के मुख्य आरोपियों में एक तत्कालीन सीइओ गोदाला किरण कुमार को विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सिलीगुड़ी कोर्ट से निलंबन मुक्त कर दिये जाने पर वामपंथियों को एकबार फिर से ममता सरकार को घेरने का मुद्दा मिल गया है.
गोदाला के निलंबन को खत्म करने पर माकपा के वरिष्ठ नेता व राज्य कमेटी के सचिव मंडली के सदस्य अशोक भट्टाचार्य ने अंगुली उठाते हुए कहा कि बदनामी के भय से मुख्यमंत्री व तणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी ने अपने पावर का इस्तेमाल करते हुए चुनाव से पहले गोदाला ही नहीं बल्कि चिटफंड जैसे अन्य घोटालों के आरोपी नेता व मंत्रियों को रिहा करवा दिया है. उन्होंने कहा कि ममता ने कइ आरोपी नेता-मंत्रियों को पार्टी से भी निष्कासित कर दिया गया था. लेकिन अब उन्हें वापस पार्टी में शामिल कर रही हैं. मुकुल राय और अराबुल इस्लाम इसका ताजा उदाहरण हैं.
श्री भट्टाचार्य ने कहा कि विभिन्न घोटालों में गिरफ्तार तणमूल के नेता-मंत्री और आइएएस अधिकारी गोदाला किरण कुमार ने पहले ही ममता सरकार को धमकी दे दी थी कि अगर उन्हें आरोपों से मुक्त नहीं किया गया तो सरकार का काला चिट्ठा सार्वजनिक कर देंगे. एसजेडीए के 200 करोड़ के कथित घोटाले में अकेले गोदाला पर गाज गिरी, जबकि बड़ी मछलियां तत्कालीन चेयरमेन व सिलीगुड़ी से तणमूल के विधायक डॉ रूद्रनाथ भट्टाचार्य, तणमूल-कांग्रेस नेता एवं एसजेडीए के बोर्ड सदस्य, अन्य अधिकारी, आरोपी ठेकेदार आज भी खुलेआम घूम रहे हैं.
श्री भट्टाचार्य ने एसजेडीए घोटाले की सीआइडी जांच पर भी सवाल खड़ा करते हुए कहा कि तणमूल सरकार के दबाव में ही पुलिस ने गोदाला की गिरफ्तारी के 90 दिन बाद भी कोर्ट में चार्जशीट दाखिल नहीं किया़ नतीजतन गोदाला को जमानत पर रिहा कर दिया गया. श्री भट्टाचार्य ने ममता सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि एसजेडीए मामले में गोदाला समेत सभी ओरोपियों की जब-तक गिरफ्तारी नहीं होती है तब-तक वामपंथी चुप नहीं बैठेंगे और आगामी चुनाव के से पहले इन मुद्दों को उठाया जायेगा.
विदित हो कि गोदाला को सरकारी परियोजनओं के शुरूआत न होने पर ही ठेकेदारों को एसजेडीए फंड से करोड़ों रूपये का भुगतान कर दिये जाने के आरोप में जेल की हवा खानी पड़ी थी. पूरे तीन महीने सिलीगुड़ी जेल में कैद रहने के बाद बीते साल 19 अक्टूबर को सिलीगुड़ी कोर्ट से जमानत पर रिहा हो गये थे.
