एक दूसरे के खिलाफ खोला मोरचा

सियासत. विमल और ममता के बीच युद्ध विराम की संभावना खत्म पहाड़ की राजनीति में बड़े बदलाव की संभावना दार्जिलिंग : राज्य की मुख्यमंत्री तथा तृणमूल सुप्रीमा ममता बनर्जी और गोजमुमो प्रमुख तथा जीटीए चीफ विमल गुरूंग के बीच पिछले कुछ महीनों से जारी तनातनी के खत्म होने की संभावना नहीं दिख रही है़ मुख्यमंत्री […]

सियासत. विमल और ममता के बीच युद्ध विराम की संभावना खत्म
पहाड़ की राजनीति में बड़े बदलाव की संभावना
दार्जिलिंग : राज्य की मुख्यमंत्री तथा तृणमूल सुप्रीमा ममता बनर्जी और गोजमुमो प्रमुख तथा जीटीए चीफ विमल गुरूंग के बीच पिछले कुछ महीनों से जारी तनातनी के खत्म होने की संभावना नहीं दिख रही है़ मुख्यमंत्री के वर्तमान दार्जिलिंग दौरे को देखकर राजनीतिक विश्लेषक कुछ इस प्रकार का अनुमान लगा रहे है़ दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में विभिन्न जातियों के लिए विकास बोर्ड बनाने का विमल गुरूंग शुरू से ही विरोध करते रहे हैं.
उनका कहना है कि अलग गोरखालैंड राज्य बनाने की मांग को लेकर जारी आंदोलन को दबाने के लिए राज्य की मुख्यमंत्री ऐसा कर रही हैं. उन्होंने कइ मौकों पर कहा है कि ममता बनर्जी बांटो और राज करो की राजनीति कर रही है़ यही वजह कि विभिन्न जातियों के लिए पहाड़ पर विकास बोर्ड बनाए जा रहे हैं. इससे गोरखा जाति में बिखराव हुआ है़
दूसरी तरफ विमल गुरूंग के लगातार विरोध के बाद भी यहां ममता बनर्जी विभिन्न जातियों के लिए विकास बोर्ड बना रही है़ लेप्चा डेवलपमेंट बोर्ड बनाने के साथ इस सिलसिले की शुरमआत हुयी थी जो अभी भी जारी है़ मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को लिंबु एवं खंबुराइ जाति के लिए विकास बोर्ड बनाने की घोषणा कर दी है़
रातनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ममता बनर्जी ने ऐसा विमल गुरूंग के जले पर नमक छिड़कने के लिए किया है़ पहाड़ पर विमल गुरूंग को कमजोर करने के लिए ममता बनर्जी एक सोची समझी रणनीति के तहत काम कर रही़ यही वजह है कि इस बार मुख्यमंत्री के सरकारी कार्यक्रम का आयोजन दार्जिलिंग से दूर सिंघमारी में किया गया़ सिंघमारी विमल गुरूंग का गढ़ है और मुख्यमंत्री ने एक तरह से उनके गढ़ में आकर उनको चुनौती दी है़ ममता बनर्जी इससे पहले भी कइ बार दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र का दौरा कर चुकी हैं और उनके तमाम सरकारी कार्यक्रम दार्जिलिंग में आयोजित होते रहे हैं.
ऐसा पहली बार हुआ है जब सिंघमारी में ममता के कार्यक्रम का आयोजन किया गया़ यहां ममता बनर्जी ने विमल गुरूंग के विरोध के बाद भी ना केवल दो जातियों के लिए बोर्ड का गठन कर दिया अपितु बगैर नाम लिए विमल गुरूंग को पहाड़ पर झगड़ा नहीं बढ़ाने की चेतावनी भी दी़ दोनों नेताओं के बीच तनातनी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ममता के आगमन को लेकर सिंघमारी में शुक्रवार को बंद सा नजारा था़
कइ स्थानों पर अलग गोरखालैंड राज्य की मांग को लेकर पोस्टर लगाए गए थे़ पूरे इलाके में तृणमूल कांग्रेस के झंडे को कहीं नहीं देखा गया़ राजनीतिक विश्लेषको का इस संबंध में कहना है कि यह सबकुछ विमल गुरूंग के इशारे पर ही हुआ है़ एक तरह से उन्होंने भी अपनी ताकत दिखाकर ममता को चुनौती दी है़
दूसरी तरफ विमल गुरूंग ने भी ममता बनर्जी की झगड़ा नहीं करने की चेतावनी पर हमला बोला है़ उन्होंने कहा है कि वह झगड़ा नहीं करना चाहते़ इसी वजह से तो ममता बनर्जी उनके इलाके में आकर जनसभा कर गयीं. यदि वह झगड़ा करते तो ममता बनर्जी यहां जनसभा नहीं कर पाती़ यह एक सरकारी कार्यक्रम था और जीटीए चीफ की हैसियत से उन्हें भी कार्यक्रम में शामिल होने का आमंत्रण मिलना चाहिए था़ राज्य सरकार और मुख्यमंत्री ने उन्हें कार्यक्रम तक में नहीं बुलाया फिर भी वह कुछ नहीं बोल रहे हैं.
इसका मतलब है कि वह झगड़ा करना नहीं चाहते़ दूसरी तरफ मुख्यमंत्री के लगातार बोर्ड बनाने और सिंघमारी में जाकर जनसभा करने से जाहिर है कि आने वाले दिनों में पहाड़ की राजनीति में बड़े बदलाव की संभावना है़ ममता बनर्जी विधानसभा चुनाव में विमल गुरूंग को उनके ही घर में घेरना चाहती है़ इसी को ध्यान में रखकर विभिन्न जातियों के लिए विकास बोर्ड का गठन किया जा रहा है़ इसमें ममता बनर्जी को थोड़ी सफलता भी मिली है़ विमल गुरूंग के जनाधार में कमी आयी है़ इसके अलवा हर्क बहादुर छेत्री सहित उनके कइ पुराने साथी उनका साथ छोड़ रहे हैं. पहाड़ पर विधानसभा की तीन सीटे हैं.
पिछले विधानसभा चुनाव में सभी तीनों सीटों पर गोजमुमो की जीत हुयी थी़ इसबार कालिम्पोंग विधानसभा सीट पर विजयी उम्मीदवार हर्क बहादुर उनके साथ नहीं है़ं विमल गुरूंग के निर्देश पर उन्होंने विधायक पद तो नहीं छोड़ा उल्टे गोजमुमो को ही बाय बाय कह दिया़ वर्तमान में कालिम्पोंग को अलग जिला बनाने की घोषणा की जा चुकी है़ हर्क बहादुर मुख्यमंत्री से कालिम्पोंग को अलग जिला बनवा चुके हैं.
वर्तमान में वहां हर्क बहादुर की तूती बोल रही है़ कालिम्पोंग में गोरखालैंड का मुद्दा पूरी तरह से गौण हो चुका है़ अब रही कालिम्पोंग और कर्सियांग विधानसभा सीट की बात,तो यहां भी ममता विमल गुरूंग के पटखनी देने की रणनीति बनाने में जुट गयी है़

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