रगबी में कमाल दिखा रही हैं चाय बागान की बेटियां

जलपाईगुड़ी. डुवार्स के बदहाल चाय बागानों की स्थिति किसी से छिपी नहीं है. चाय बागान का मतलब है कि भूख और बदहाली. लेकिन इसी चाय बागान से कई बच्चे अपनी उपलब्धि के द्वारा न केवल चाय बागान, बल्कि राज्य का नाम भी रोशन कर रहे हैं. स्वपना उरांव, मीनूका कारवा, संध्या राई आदि लड़कियां सिर्फ […]

जलपाईगुड़ी. डुवार्स के बदहाल चाय बागानों की स्थिति किसी से छिपी नहीं है. चाय बागान का मतलब है कि भूख और बदहाली. लेकिन इसी चाय बागान से कई बच्चे अपनी उपलब्धि के द्वारा न केवल चाय बागान, बल्कि राज्य का नाम भी रोशन कर रहे हैं. स्वपना उरांव, मीनूका कारवा, संध्या राई आदि लड़कियां सिर्फ जिले को ही नहीं, बल्कि राज्य को भी गौरवान्वित कर रही हैं. यह सभी लड़कियां विदेशी खेल रगबी में पारंगत हैं.

सरस्वतीपुर चाय बागान इन्हीं लोगों की बदौलत ख्यात अर्जित किया है. इस चाय बागान की पांच महिला रगबी खिलाड़ी चेन्नई गई हुई हैं. चेन्नई में राष्ट्रीय रगबी टीम का चयन होना है. एक बार यदि इनका चयन हो जाता है, तो यह लोग राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी ख्याति अर्जित करेंगी. जलपाईगुड़ी के राजगंज के निकट गाजलडोबा स्थित सरस्वती चाय बागान की ये महिला रगबी खिलाड़ियों की चर्चा यहां जोरों पर है. पिछले साल इन चाय बागान की खिलाड़ियों ने बंगाल टीम का प्रतिनिधित्व किया था. उड़ीसा में आयोजित चैम्पियनशिप में बंगाल ने महाराष्ट्र को हराकर खिलाबी जीत हासिल की थी.

उस टूर्नामेंट में सरस्वती चाय बागान की इन सभी खिलाड़ियों ने शानदार खेल का प्रदर्शन किया था. इन महिला खिलाड़ियों के कोच रोशन खोखो ने बताया है कि यह सभी खिलाड़ी बेहद गरीब परिवार से हैं. ट्यूशन फीस भी बड़ी मुश्किल से जुटा पाती हैं. उसके बाद भी रगबी खेल के प्रति इन सभी में जुनून है. राज्य रगबी टीम में कुल 12 खिलाड़ी हैं और यह सभी महिला खिलाड़ी सरस्वतीपुर चाय बागान की रहने वाली हैं. बैकुंठपुर जंगल में बने मैदान में इन्हें प्रशिक्षण दिया जाता है. राज्य सरकार की ओर से इन लोगों की मदद की जानी चाहिए. एक रगबी खिलाड़ी चंदा उरांव ने बताया है कि यदि नियमित रूप से पौष्टिक आहार मिले तो वह लोग खेल में और भी बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं.

चाय बागान में परिवार के लोग काम करते हैं. चाय बागान से मिली रकम से पूरे परिवार का भरण-पोषण संभव नहीं है. इसके अलावा जंगली इलाके से प्रशिक्षण लेकर घर लौटने के क्रम में कई बार जान को भी खतरा होता है. जंगली हाथी के अचानक सामने आ जाने के कारण हमेशा ही जान जाने का खतरा बना रहता है. फिर भी वह सभी इस खेल को आगे बढ़ाने के लिए लगातार परिश्रम कर रही हैं. एक अन्य खिलाड़ी मीनूका करवा ने बताया है कि बंद चाय बागानों के चाय श्रमिक भूखों मर रहे हैं. यह भाग्य की बात है कि उन लोगों का चाय बागान खुला हुआ है. सीमित संसाधन में ही वह सभी लगातार परिश्रम कर रही हैं.

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