साधू-महात्माओं के बीच भजन कीर्तन और शंख ध्वनि के साथ महा आरती की शुरूआत हुइ़ इसके अलावा सैकड़ों लोगों ने दीपदान भी किया़ इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने महानंदा नदी की प्रदूषण से मुक्त बनाने की भी शपथ ली़ इसके साथ ही नदियों को प्रदूषण से बचाने के लिये बिहारी युवा चेतना समिति की ओर से एक एतिहासिक कदम की शुरूआत हो गयी. हिंदू धर्म नगरी काशी में गंगा नदी के घाट पर प्रत्येक दिन आयोजित होने वाली गंगा आरती के तर्ज पर सिलीगुड़ी के महानंदी नदी के लालमोहन निरंजन मौलिक घाट पर महानंदा नदी के किनारे यह महा आरती की गयी़ इस मौके पर करीब दो दर्जन पुरोहितों द्वारा वेद मंत्रोच्चार से पूजन कर शाम के समय महानंदा नदी की आरती की गयी.
इस कार्यक्रम में शहर के हजारों लोग घाट पर मौजूद हुये.बिहारी युवा चेतना समिती के अध्यक्ष मिथलेश मिश्रा ने बताया कि आज महानंदा नदी को बचाने के लिये पूजन व आरती के माध्यम से नगरवासियों जागरूक किया गया. उन्होंने कहा कि महानंदा को महागंदा नहीं होने दिया जायेगा. उन्होंने कहा कि महानंदा नदी अपनी पुरानी पहचान खो चुकी है़ इस नदी को नाले में तब्दील कर दिया गया है और सभी को मिलकर इस नदी के पुराने स्वरूप को वापस लाना होगा़ उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने आगे कहा कि समाज के हर वर्ग का महानंदा को भी गंगा की तरह पूर्ण आस्था के साथ पूजना और पवित्र बनाये रखना परम कर्तव्य है.
श्री मिश्रा ने कहा कि महानंदा के प्रति लोगों में आस्था का अलख जगे इसके लिए समिति की ओर इस मुहिम की शुरूआत की गयी है. इसके तहत प्रत्येक महीने के पूर्णिमा की शाम को महानंदा के विभिन्न घाटों पर वाराणसी के गंगा आरती के तर्ज पर महाआरती-पूजन का आयोजन होगा. यह मुहिम सिर्फ लाल मोहन घाट तक ही सिमित नहीं रहेगी़ महानंदा नदी के किनारे अन्य घाटों पर भी आने वाले दिनों में इसी प्रकार की महा आरती का आयोजन किया जायेगा़ इससे लोगों में महानंदा के प्रति आस्था जागृत होगी और तभी महानंदा का अस्तित्व भी बचेगा. इस मौके पर संगठन के उपाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह और सचिव राजेश राय भी उपस्थित थे़.
