मालदा: सरकारी रूप से निषेधाज्ञा रहने के बाद भी मालदा के प्राचीन ऐतिहासिक केंद्र गौड़ इलाके में पिकनिक चल रहा है. जमीन खोद चुल्हा बनाकर भोजन तैयार किया जा रहा है. इसके अतिरिक्त खाने के लिये उपयोग में लाये गये साल के पत्ते, थर्मोकोल के पत्ते, प्लास्टिक के ग्लास एवं अन्य चीजों से इस इलाके में गंदगी फैलायी जा रही है. आरोप है कि जिला प्रशासन एवं आरकोलोजिकल सर्वे ऑफ इंडिया(एएसआइ) की ओर से भी कड़े कदम नहीं उठाये जा रहें हैं. फलस्वरूप गौड़ के रख-रखाव को लेकर प्रश्न खड़ा हो रहा है.
प्रवेश निषेध नियम का उल्लंघन कर गौड़ के ऐतिहासिक केंद्र पर पिकनिक मनाये जाने के संबध में एएसआई के किसी भी अधिकारी ने कुछ भी कहने से इंकार कर दिया. अधिकारियों ने पूरे मामले को टाल दिया.
यहां उल्लेखनीय है कि राज्य के प्राचीन ऐतिहासिक स्थलों में गौड़ भी एक महत्वपूर्ण स्थल है. यहां बारहदुआरी से लेकर चामचिका मस्जिद, फिरोज मिनार, दाखिला दरवाजा सहित कई दर्शनीय स्थल हैं. प्राचीन इतिहास को जानने के लिये अभी भी गौड़ के कई इलाकों में एएसआइ की ओर से खनन का कार्य जारी है. गौड़ के विभिन्न इलाकों में बड़े-बड़े अक्षरों में “वन भोज निषेध” लिखा हुआ साइन बोर्ड विभाग की ओर से लगाया गया है. लेकिन साइन बोर्ड में लिखे इस फरमान को कोइ मानता नहीं. विभिन्न इलाकों से आये लोग सरकारी फरमान की अवहेलना कर वनभोज का आयोजन कर रहे है. सिर्फ आयोजन ही नहीं बल्कि वनभोज के जरिये इलाके में गंदगी भी फैला रहे हैं.
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक वनभोज निषेध का साइन बोर्ड लगाने के साथ साथ निगरानी के लिये एक कर्मचारी को भी नियुक्त किया गया है. अब एक अकेले व्यक्ति से पूरे गौड़ इलाके में निगरानी रखना संभव भी नहीं है. निगरानी रखने के लिये स्थानीय पुलिस व संबधित कार्यालय की सहायता की जरूरत है.मालदा के गौड़ इलाके में प्राचीन दर्शनीय स्थल को देखने के लिये पर्यटकों का आना-जाना पूरे वर्ष लगा रहता है़ पौष महीना आते ही वनभोज करने के लिये दूर-दूर से लोग आते है. खुला मैदान, जलाशय आदि स्थानों में वनभोज का आनंद लेते है.
जिला पुलिस अधीक्षक प्रसून बनर्जी ने बताया कि गौड़ इलाके में पुलिस की एक चौकी है. चौकी के पुलिस कर्मचारी उस इलाके में निगरानी रखते हैं. लेकिन गौड़ इलाके के भीतर का इलाका एएसआइ के अधीन है एवं निगरानी रखने की जिम्मेदारी भी एएसआइ की ही है. इसके अतिरिक्त कुछ भी कहना संभव नहीं.
