लेकिन वास्तविकता यह है कि हिंदी भाषा के विद्यार्थी बांग्ला भाषा को सिर्फ एक विषय के रूप में पास करने के लिए पढ़ते है. सप्तम या अष्टम श्रेणी के बाद हिंदीभाषी विद्यार्थी के पास बांग्ला भाषा का कोई प्रयोग नहीं रह जाता. पहले तो बांग्ला व अंग्रेजी में प्रश्न पत्र होने के भय से हिंदीभाषी विद्यार्थी बांग्ला को भी महत्व देते थे, लेकिन हिंदी में प्रश्न पत्र आने के बाद बांग्ला को याद रखने की जरूरत ही नहीं.
बांग्ला में टेस्ट पेपर से हिंदीभाषी छात्र परेशान
जलपाईगुड़ी. प्रत्येक वर्ष भाषा को लेकर हिंदीभाषी विद्यार्थियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. पहले उन्हें हिंदी में प्रश्न पत्र नहीं मिलने की वजह से परेशान होना पड़ता था, अब टेस्ट पेपर (मॉडल पेपर) को लेकर परेशान होना पड़ रहा है. फरवरी महीने में पश्चिम बंगाल की माध्यमिक बोर्ड परीक्षा होने वाली है, लेकिन […]

जलपाईगुड़ी. प्रत्येक वर्ष भाषा को लेकर हिंदीभाषी विद्यार्थियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. पहले उन्हें हिंदी में प्रश्न पत्र नहीं मिलने की वजह से परेशान होना पड़ता था, अब टेस्ट पेपर (मॉडल पेपर) को लेकर परेशान होना पड़ रहा है. फरवरी महीने में पश्चिम बंगाल की माध्यमिक बोर्ड परीक्षा होने वाली है, लेकिन अभी तक हिंदी में टेस्ट पेपर न मिलने से हिंदीभाषी विद्यार्थियों के सिर पर काफी बोझ आ गया है. कहने वाले तो कहते हैं कि हिंदी विद्यालयों में भी बांग्ला विषय की पढ़ाई करायी जाती है.
अब इस वर्ष समस्या यह है कि माध्यमिक परीक्षा में अब करीब डेढ़ महीने ही शेष हैं. परीक्षा में अपना परिणाम अच्छा करने के लिए माध्यमिक के छात्र पहले टेस्ट पेपर खरीदते थे, लेकिन इस वर्ष राज्य सरकार ने मुफ्त में छात्रों को टेस्ट पेपर वितरित करने की घोषणा की है. लेकिन जलपाईगुड़ी व अलीपुरद्वार जिले के हिंदीभाषी विद्यार्थियों को भी बांग्ला माध्यम का टेस्ट पेपर वितरित किया जा रहा है. इसे लेकर हिंदी छात्र-छात्राओं में रोष व्याप्त हो गया है. यहां तक कि कुछ विद्यार्थियों ने टेस्ट पेपर वापस कर दिया है, जबकि कुछ ने टेस्ट पेपर लिया ही नहीं. हिंदीभाषी विद्यार्थियों का कहना है कि इतने वर्षों से हिंदी माध्यम से पढ़ाई करते आ रहे हैं. परीक्षा दरवाजे पर खड़ी है, तो उसकी तैयारी बांग्ला माध्यम के टेस्ट पेपर से कैसे करेंगे. इस सोची-समझी सरकारी भूल या त्रुटि से हिंदीभाषी विद्यार्थी काफी हताश हैं. इस मामले को लेकर दोनों जिलों में विवाद शुरू हो गया है. पक्षपात करने का आरोप लगने पर जिला शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने टेस्ट पेपर बदल देने का आश्वासन दिया है. हिंदी विद्यालयों के विद्यार्थियों का कहना है कि मुफ्त में टेस्ट पेपर मिलने की बात जानकर मन गदगद हो गया था, लेकिन हाथ में बांग्ला माध्यम का टेस्ट पेपर मिलने पर उत्साह पर पानी फिर गया. बांग्ला भाषा का टेस्ट पेपर हिंदीभाषी विद्यार्थियों के किसी काम का नहीं है. परीक्षा से कुछ दिन पहले माध्यमिक के छात्र परीक्षा के लिए अपनी अंतिम दौर की तैयारी में होते हैं. ऐसे समय में इस तरह का मामला हिंदी भाषीय विद्यार्थियों के साथ किया गया एक धोखा है और कुछ नहीं.
निखिल बंग शिक्षक समिति के जलपाईगुड़ी व अलीपुरद्वार जिले के सचिव भागीरथ राय व काकुली भौमिक ने बताया कि हिंदी माध्यम विद्यालयों के छात्रों के लिए हिंदी में टेस्ट पेपर देने का आवेदन शिक्षा विभाग को किया गया था. लेकिन शिक्षा विभाग की ओर से हिंदीभाषी विद्यार्थियों के लिये बांग्ला टेस्ट पेपर भेजा गया है. परीक्षा के कुछ दिन पहले ऐसी घटना से हिंदीभाषी विद्यार्थियों का हताश होना लाजिमी है. परीक्षा के इन दिनों में छात्रों के लिये एक-एक मिनट का महत्व होता है.
जिला विद्यालय निरीक्षक (माध्यमिक) स्वपन सामंतु ने बताया कि सभी टेस्ट पेपर बांग्ला में आया है. हिंदी टेस्ट पेपर आने पर इसे बदल दिया जायेगा. उल्लेखनीय है कि जलपाईगुड़ी व अलीपुरद्वार जिले में कुल 26 हिंदी विद्यालय हैं एवं सभी विद्यालयों में ऐसा ही घटित हुआ है.