गौरतलब है कि सिलीगुड़ी के विधायक डॉ रूद्रनाथ भट्टाचार्य ने निगम पर आरोप लगाया था कि विधायक फंड से किरण चंद्र शमसान घाट के विभिन्न कार्यों के लिये आवंटित किये गये रुपयों को निगम किसी अन्य मद में खर्च कर चुकी है. इस आरोप के जवाब देते हुये नुरूल इस्लाम ने बताया कि विधायक फंड से 9 लाख 98 हजार 998 रूपया शमशान घाट के दो परियोजना व तराई तारा पद विद्यालय में लाइट लगाने के लिये दिया गया था. विद्यालय का काम पूरा होने के बाद विधायक ने स्वयं लाइट का उद्घाटन किया था. इसके अतिरिक्त शमशान घाट में भी उनके फंड से मिले चार लाख रूपये का काम संपन्न करा दिया है. विधायक फंड से मिले अब सिर्फ चार लाख रुपये बचे है जिससे शमशान घाट का शौचालय, दशकर्म भंडार व शव रखने के लिये मार्बल का स्लैब बनाने का काम शेष है.
इस काम में निगम की वाम बोर्ड ने और भी दस लाख रुपया लगाकर शव रखने के लिये जो मार्बल स्लैप बनाया जायगा उसके ऊपर शेड, शौचालय के साथ स्नानागार आदि बनाने की योजना ली है जिसका काम अगले सोमवार से शुरू होगा. विधायक के रुपयों से स्लैब, दशकर्म भंडार आदि के काम के लिये तीसरा टेंडर जारी किया गया है.
नुरूल इस्लाम ने कहा कि राज्य सरकार के पास सिलीगुड़ी नगर निगम का 85 करोड़ रुपया प्राप्य है जिसे राज्य सरकार नहीं दे रही है. इसके अलावा एसजेडीए के पास निगम का 6 करोड़ 44 लाख रुपया डॉ रूद्रनाथ के चेयरमैन रहने के समय से ही प्राप्य है. कुछ दिन पहले ही एसजेडीए की ओर से एक पत्र भेजकर निगम को सूचित किया गया है कि अब बकाया रूपया नहीं दिया जा सकता. सिलीगुड़ी नगर निगम के वाम बोर्ड के साथ इस तरह का खेल रचने वालों को वाम बोर्ड पर आरोप लगाने का कोई नैतिक अधिकार ही नहीं है.
