छह महीने में 25 लकड़ी माफिया गिरफ्तार

जलपाईगुड़ी. पिछले छह महीने के दौरान वन विभाग ने विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के साथ अभियान चलाकर 25 लकड़ी माफिया को गिरफ्तार किया है. इन लोगों से 30 रुपये से भी अधिक की साल की लकड़ी जब्त की गई है. इतना ही नहीं, लकड़ी तस्करी के काम में आने वाले 22 गाडि़यों को भी वन विभाग […]

जलपाईगुड़ी. पिछले छह महीने के दौरान वन विभाग ने विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के साथ अभियान चलाकर 25 लकड़ी माफिया को गिरफ्तार किया है. इन लोगों से 30 रुपये से भी अधिक की साल की लकड़ी जब्त की गई है. इतना ही नहीं, लकड़ी तस्करी के काम में आने वाले 22 गाडि़यों को भी वन विभाग ने जब्त कर लिया है.

इस अभियान की शुरूआत इस वर्ष अप्रैल में हुई. उसके बाद से लेकर अब तक लकड़ी तस्करी के कई मामले को निपटाने में वन विभाग को सफलता मिली है. बृहस्पतिवार को भी धूपगुड़ी के गादंग ग्राम पंचायत इलाके के झटियारहाट इलाके से एसएसबी एवं वन विभाग ने संयुक्त अभियान चलाकर एक लाख रुपये से भी अधिक मूल्य की साल की लकड़ी बरामद की.

लकड़ी तस्करी के काम में आने वाले वाहन को भी पकड़ लिया गया है. हालांकि इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है. पिछले छह महीने के दौरान जलपाईगुड़ी के गयरकाटा इलाके के मोराघाट रेंजर ने एसएसबी के सहयोग से इन अभियानों को अंजाम दिया है. मोराघाट रेंज के रेंजर अजय घोष ने बताया है कि धूपगुड़ी, वानरहाट, फालाकाटा, वीरपाड़ा आदि इलाके में तस्करी के कई मामलों का भंडाफोड़ किया गया है. उन्होंने कहा कि छह महीने में 25 लकड़ी माफियाओं की गिरफ्तारी हुई है. इतने बड़े पैमाने पर तस्करों की गिरफ्तारी से लकड़ी की तस्करी में थोड़ी कमी आयी है. उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर वाहनों के पकड़े जाने के बाद लकड़ी तस्करों ने लकड़ी तस्करी के लिए दूसरा रास्ता अख्तियार कर लिया है. यह लोग अब नदी से दूसरे स्थान पर लड़की भेज रहे हैं. ट्यूब में हवा भड़कर लकडि़यों के सिल्ली को उसमें बांध दिया जाता है और नदी में छोड़ दिया जाता है.

आगे जाकर तस्कर इस लकड़ी को नदी से बाहर निकाल लेते हैं. तस्करों के इस काम में स्थानीय लोगों की भी संलिप्तता होती है. वनांचल तथा ग्रामीण क्षेत्र के गरीब लोग कुछ रुपये की लालच में इन तस्करों की मदद करते हैं. श्री घोष ने आगे बताया कि मोराघाट जंगल का क्षेत्रफल करीब पांच हजार हेक्टेयर में है. इन पर नजर रखने के लिए वन विभाग की ओर से तीन बिट ऑफिस तो बनाये गये हैैं, लेकिन कर्मचारियों की संख्या काफी कम है. मात्र 40 कर्मचारियों की मदद से इतने बड़े क्षेत्रफल की निगरानी रखनी पड़ रही है. कभी-कभी हाथी निकलने की घटना से परेशानी और बढ़ जाती है. वन कर्मचारियों को भाग कर उस इलाके में जाना पड़ता है. ऐसी परिस्थिति का फायदा लकड़ी तस्कर उठाते हैं. रेंजर घोष ने आगे कहा कि इस पूरे मामले की जानकारी वन विभाग के उच्चाधिकारियों को भी दी गई है.

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