स्थापित कलाकारों से मिल रही है चुनौती
नयी तकनीक का लिया सहारा
पिता कर रहे हैं मदद
मालदा. मात्र 10 साल की उम्र में एक बच्चा यहां दुर्गा प्रतिमा बनाने के कार्य में दिन-रात जुटा हुआ है. इस नन्हें कलाकार का नाम मनोज चक्रवर्ती है. उसके पिता जगबंधू चक्रवर्ती इस काम में उसकी मदद करते हैं. मालदा में यह नन्हा कलाकार तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद प्रतिमा निर्माण के काम में जुटा हुआ है. हालांकि उसे इस काम में यहां के स्थापित कलाकारों से कड़ी चुनौती मिल रही है. यही वजह है कि उसके पास प्रतिमा बनाने का काम बहुत पूजा कमेटियों ने दिया है.
चौथी कक्षा में पढ़ने वाले इस छात्र को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. उसके लिए यह मायने नहीं रखता कि वह कितनी प्रतिमाओं का निर्माण कर रहा है. मात्र एक प्रतिमा बनाने से भी वह काफी खुश है. उसके द्वारा बनाये गये इस प्रतिमा की स्थापना एक पारिवारिक पूजा भी की जायेगी. पांच फीट की देवी दुर्गा सहित वह सरस्वती, लक्ष्मी, कार्तिक, गणेश तथा महिसासूर की भी मूर्ति बना रहा है.
मालदा शहर के सुकांतपल्ली में रहने वाले जगबंधू चक्रवर्ती की प्रतिमा निर्माण के क्षेत्र में काफी ख्याति है. समय के साथ-साथ दुर्गा प्रतिमा के निर्माण का तरीका भी बदल गया. इस आधुनिक युग में प्रतिमा निर्माण का तरीका भी आधुनिक हो गया. समय के साथ जगबंधू चक्रवर्ती नहीं चल सके. यही वजह है कि धीरे-धीरे उन्हें प्रतिमा बनाने का काम मिलना कम हो गया. उनके परिवार में तीन बच्चे, पत्नी, वृद्ध माता-पिता हैं.
घर में बड़ा लड़का मनोज है. बच्चों की पढ़ाई-लिखाई सहित अन्य पारिवारिक खर्चे को चलाने के लिए जगबंधू चक्रवर्ती को काफी मेहनत करनी पड़ती है. तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है.
आखिरकार बड़े बेटे मनोज चक्रवर्ती ने प्रतिमा निर्माण के काम मेें अपने पिता की सहायता शुरू कर दी. अब स्थिति यह है कि मनोज मुख्य कलाकार है और उसके पिता उसके सहायक बन गये हैं. मनोज सुकांतपल्ली इलाके में स्थित बाबलावना प्राथमिक स्कूल में पढ़ता है. पढ़ाई से समय निकाल कर बाकी का समय वह दुर्गा प्रतिमा बनाने में लग जाता है. उसके काम की काफी सराहना की जाती है.
