बिमल गुरूंग का पतन शुरू : प्रताप

सिलीगुड़ी. गोजमुमो के दो विधायकों के पार्टी छोड़ने के बाद पार्टी सुप्रीमो बिमल गुरूंग के पतन की शुरूआत हो गई है और अगले कुछ महीनों में दार्जिलिंग पहाड़ से पार्टी का नामोनिशान खत्म हो जायेगा. यह बातें अखिल भारतीय गोरखा लीग (अभागोली) के महासचिव प्रताप खाती ने कही. उल्लेखनीय है कि अभागोली संस्थापक मदन तामांग […]

सिलीगुड़ी. गोजमुमो के दो विधायकों के पार्टी छोड़ने के बाद पार्टी सुप्रीमो बिमल गुरूंग के पतन की शुरूआत हो गई है और अगले कुछ महीनों में दार्जिलिंग पहाड़ से पार्टी का नामोनिशान खत्म हो जायेगा. यह बातें अखिल भारतीय गोरखा लीग (अभागोली) के महासचिव प्रताप खाती ने कही. उल्लेखनीय है कि अभागोली संस्थापक मदन तामांग हत्याकांड में बिमल गुरूंग मुख्य आरोपियों में शुमार हैं और उनके खिलाफ सीबीआई ने कोलकाता के नगर दायरा अदालत में चार्जशीट दायर कर रखी है.
प्रताप खाती ने कहा कि बिमल गुरूंग पूरी तरह से तानाशाह हैं. वह शुरू से ही आपराधिक गतिविधियों में लिप्त रहे हैं. उनका न तो कोई आदर्श है और न ही कोई नीति. गोरखालैंड राज्य बनवाने के नाम पर उन्होंने सिर्फ राजनीति की. पहाड़ के पढ़े-लिखे लोग भी उनके बहकावे में आ गये और उनके साथ जुड़ गये. अब इन लोगों को अपनी गलतियों का एहसास हो रहा है. यही वजह है कि एक-पर-एक लोग बिमल गुरूंग का साथ छोड़ते जा रहे हैं. जिन दो गोजमुमो विधायकों हर्क बहादुर छेत्री तथा त्रिलोक कुमार देवान ने पार्टी छोड़ी है, वह लोग ज्ञानी माने जाते हैं. इन लोगों को अपनी गलतियों का एहसास हुआ और आखिरकार दोनों ने पार्टी छोड़ दी.
श्री खाती ने एक सवाल के जवाब में कहा कि गोजमुमो छोड़ने वाले किसी भी नेता को वह अपनी पार्टी में शामिल नहीं करेंगे. इन लोगों ने शुरू से ही बिमल गुरूंग की जी-हुजूरी की. इन लोगों को अपनी गलतियों का एहसास काफी देर से हुआ है. इन लोगों ने भले ही गोजमुमो से इस्तीफा दे दिया हो, लेकिन बिमल गुरूंग जैसे एक आपराधिक प्रवृत्ति के व्यक्ति का इन लोगों ने अब तक साथ दिया. श्री खाती टेलीफोन पर विशेष बातचीत कर रहे थे.
उन्होंने आगे कहा कि अगर त्रिलोक कुमार देवान अथवा हर्क बहादुर छेत्री उनसे अभागोली में शामिल होने के लिए संपर्क भी करेंगे, तो भी उन्हें वह अपनी पार्टी में शामिल नहीं करेंगे, क्योंकि यह लोग अब एक तरह से पार्टी के लिए बोझ साबित होंगे. इस बीच, गोजमुमो के दो विधायकों के पार्टी छोड़ देने के बाद दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र की राजनीति में भूचाल आ गया है. यहां पर राजनीतिक गतिविधियां काफी तेज हो गई है. गोजमुमो विरोधी तमाम राजनीतिक दलों की सक्रियता काफी बढ़ गई है. खाकसर मन घीसिंग के नेतृत्व वाली गोरामुमो तथा तृणमूल कांग्रेस की बांछे खिल गई हैं. गोरामुमो किसी भी कीमत पर गोजमुमो में मचे इस घमासान का लाभ उठाना चाहती है.
गोरामुमो नेताओं का कहना है कि बिमल गुरूंग ने पहाड़ पर अपनी ताकत बढ़ाने के बाद विरोधी दलों के नेताओं के साथ ज्यादती की. तमाम विरोधी दलों के नेताओं को पहाड़ से खदेड़ दिया गया. बिमल गुरूंग की इस ज्यादती का शिकार स्वर्गीय सुवास घीसिंग तक को होना पड़ा था. सुवास घीसिंग को भी दार्जिलिंग स्थित अपने घर को छोड़कर जलपाईगुड़ी तथा सिलीगुड़ी में शरण लेनी पड़ी थी. गोरामुमो नेताओं ने आगे कहा कि आने वाले दिनों में ऐसी ही स्थिति बिमल गुरूंग के साथ होगी. इधर, गोजमुमो के दो विधायकों द्वारा पार्टी छोड़ देने के बाद बिमल गुरूंग पर दबाव काफी बढ़ गया है. उनकी पार्टी में भी टूट का खतरा पैदा हो गया है. डॉ हर्क बहादुर छेत्री के नजदीकी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, गोजमुमो के कालिम्पोंग के कई नेता उनके संपर्क में हैं. हर्क बहादुर छेत्री ने भले ही पार्टी छोड़ दी हो, लेकिन विधायक पद से इस्तीफा नहीं दिया है.
सूत्रों ने बताया कि उनकी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ भी बातचीत हुई है. वह देर-सवेर तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं. ऐसे भी तृणमूल कांग्रेस के जिला अध्यक्ष तथा उत्तर बंगाल विकास मंत्री गौतम देव ने संकेत दिया है कि यदि गोजमुमो के बागी नेता पार्टी में शामिल होते हैं, तो उनका स्वागत है.
दूसरी तरफ पार्टी में इस घमासान के बाद बिमल गुरूंग दार्जिलिंग में नहीं हैं. वह पूजा-पाठ करने के लिए नेपाल के पशुपतिनाथ रवाना हो गये हैं. हालांकि उनके पूजा-पाठ पर भी विरोधियों ने चुटकी ली है. अभागोली महासचिव प्रताप खाती का कहना है कि बिमल गुरूंग चाहे जितना भी पूजा-पाठ कर लें, उनकी पार्टी को कोई नहीं बचा सकता. इस बीच, राजनीतिक विश्लेषकों ने दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में गोरखालैंड आंदोलन के हिंसक होने की संभावना जतायी है. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि राज्य सरकार के साथ टकराव के बाद बिमल गुरूंग ने पहले से ही 7 अक्टूबर से गोरखालैंड आंदोलन शुरू करने की घोषणा कर रखी है. पहाड़ पर अपना जनाधार बचाने तथा पार्टी में टूट को रोकने के लिए गोजमुमो समर्थक हिंसक गोरखालैंड आंदोलन भी शुरू कर सकते हैं.
ममता की रणनीति कामयाब
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि गोजमुमो को लेकर तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी की रणनीति कामयाब दिखती नजर आ रही है. ममता बनर्जी ने राज्य में सत्ता संभालने के बाद जीटीए का गठन कर गोरखालैंड की समस्या समाधान करने की कोशिश की थी. लेकिन इसका दीर्घकालिक फायदा नहीं हुआ है. जीटीए के गठन के बाद से ही राज्य सरकार और बिमल गुरूंग के बीच तू तू मैं मैं जारी है. बिमल गुरूंग को कमजोर करने तथा पहाड़ पर अपनी राजनैतिक शक्ति बढ़ाने में पिछले तीन वर्षों से ममता बनर्जी जुटी हुई थीं. वह बार-बार दार्जिलिंग दौरे पर आयीं और विभिन्न विकास योजनाओं का ऐलान किया. इतना ही नहीं, उन्होंने पहाड़ की चार जनजातियों के लिए अलग से डेवलपमेंट बोर्ड बनाने की भी घोषणा की. इसकी वजह से लेप्चा, भुटिया, मंगर तथा शेरपा जाति के लोग गोजमुमो से अलग हुए और तृणमूल कांग्रेस में जुड़ गये. पहाड़ पर तृणमूल कांग्रेस की सांगठनिक शक्ति काफी बढ़ गई. कल ही तृणमूल कांग्रेस की ओर से पूरे पहाड़ पर गोजमुमो के खिलाफ रैली निकाली गई. इस रैली में भारी संख्या में तृणमूल समर्थक शामिल थे.
त्रिलोक देवान के घर की बढ़ी सुरक्षा
गोजमुमो तथा विधायक पद से इस्तीफा देने के बाद दार्जिलिंग में त्रिलोक कुमार देवान के घर की सुरक्षा बढ़ा दी गई है. दार्जिलिंग के चौरास्ता के नीचे स्थित उनके घर के आसपास सीआरपीएफ जवानों को गश्त करते देखा गया. श्री देवान अभी कोलकाता में ही हैं. पार्टी छोड़ने के बाद उनके खिलाफ गोजमुमो समर्थकों में भारी रोष है. जिला पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, श्री देवान के घर की सुरक्षा बढ़ायी गई है. उनके दार्जिलिंग लौटने के बाद उनकी भी सुरक्षा बढ़ायी जायेगी.

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