सिलीगुड़ी. सिलीगुड़ी महकमा परिषद के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में तृकां को हराने हेतु माकपा-कांग्रेस के बीच गुुप्त गठबंधन होने की बात सामने आने के बाद चुनावी माहौल में उथल-पुथल है. इस गुप्त गठबंधन के खुलासे के बाद से ही तृकां के नेता-मंत्रियों के जहां होश उडे़ हुए हैं वहीं, रातों की नींद गायब हो गयी है.
तृकां के मंत्री, वरिष्ठ नेता व कार्यकर्ता बीते दो-तीन दिनों से दिन-रात गांव-गांव में जाकर स्थानीय तृणमूल नेताओं व कार्यकर्ताओं के साथ तूफानी बैठक कर रहै हैं और घर-घर जाकर चुनाव प्रचार तेज करने एवं ग्रामीणों को तृकां से जोड़ने की अपील कर रहे हैं. साथ ही हर कीमत पर महकमा परिषद दखल करने का निर्देश भी दे रहे हैं. हालांकि तृकां के नेता माकपा-कांग्रेस के बीच हुए गुुप्त गठबंधन को चुनावी नाटक एवं गांवों के भोली-भाली जनता को बेवकूफ बनाने की कोशिश करार दे रहे हैं. वहीं, माकपा व कांग्रेस के नेता इसे अलिखित और ग्रामीणों के हक का गठबंधन करार दे रहे हैं.
कहां-कहां हुआ गंठबंधन
माकपा-कांग्रेस के बीच फांसीदेवा प्रखंड क्षेत्र में गुप्त गठबंधन हुआ है. प्रखंड के चटहाट-बांसगांव ग्राम पंचायत के कुल 18 सीटों में से नौ सीटों का माकपा व कांग्रेस ने बंटवारा किया है. माकपा ने इस ग्राम पंचायत क्षेत्र के नया बाजार, चटहाट, खालपाड़ा, बांदरझूली, मिलनगढ़, माटीगाड़ा जोड़पाकड़ी, भीमागच्छ, पेटकी व चिकनमाटी सीट पर अपना उम्मीदवार खड़ा किया है. वहीं, कांग्रेस ने हापतियागच्छ,खूदिगच्छ, पश्चिम नया बाजार, कूचियामोड़, बाजारुगच्छ, मूडि़खोया, पश्चिम जोड़पाकड़ी व तेलिगच्छ सीटों पर अपना उम्मीदवार खड़ा किया है. पंचायत समिति के भी तीन सीटों में से दो सीटों पर कांग्रेस व एक सीट पर माकपा का उम्मीदवार है.
क्या कहना है माकपा का
माकपा के चटहाट अंचल कमेटी के सचिव नूरूल इस्लाम का कहना है कि ग्रामीण खुद ही अब तृकां को और देखना नहीं चाहते. इसलिए ग्रामीणों के हक में यह फैसला लिया गया है. तृकां को हराने के लिए एकमात्र यही रास्ता बचा था. लेकिन, हमने भाजपा के साथ हाथ नहीं मिलाया. वहीं, माकपा के दार्जिलिंग जिला इकाई के सचिव जीवेश सरकार ने भी गुप्त गठबंधन की बात को स्वीकार किया है. उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव को लेकर नीच ेस्तर में गठबंधन हुआ है. तृकां को हर हाल में हराने के लिए ही हमने अनुष्ठानिक रुप से नहीं, बल्कि अलिखित गठबंधन किया है.
क्या कहना है कांग्रेस का
कांग्रेस के चटहाट अंचल के सचिव वजरुल इस्लाम का कहना है कि यह कांग्रेस का नहीं बल्कि ग्रामीणों का ही फैसला है. इस बार ग्रामीण चाहते हैं कि इस ग्राम पंचायत का योग्य मुखिया कांग्रेस का हो या माकपा का इससे कोई लेना-देना नहीं है. लेकिन तृकां के भ्रष्ट नेताओं को नहीं जीतने देंगे. कांग्रेस के दार्जिलिंग जिला के अध्यक्ष व विधायक शंकर मालाकार का कहना है कि कहीं भी आधिकारिक रुप से नहीं, बल्कि अलिखित समझौता हुआ है. नीचे स्तर पर कहीं माकपा अपना उम्मीदवार नहीं दे सकी है, तो कहीं हम अपना उम्मीदवार नहीं दे सके. इसी वजह से इस चुनावी मैदान में कहीं-कहीं कांग्रेस माकपा के साथ हाथ मिलाकर चुनाव लड़ रही है.
तृकां का कटाक्ष ‘गंठबंधन नहीं नाटक’
तृकां के दार्जिलिंग जिला इकाई के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक चक्रवर्ती ने माकपा-कांग्रेस के इस गठबंधन पर कटाक्ष करते हुए कहा है कि यह ‘गठबंधन नहीं नाटक’ है और दोनों दल के नेता गांवों के भोली-भाली जनता को बेवकूफ बनाने का प्रयास कर रहे हैं. वर्ष भर दोनों दलों के नेता एक-दूसरे को गाली-गलौज करते नहीं थकते और चुनाव आते ही गले मिलते हैं. हालांकि इस चुनावी मिलन से तृकां की जीत के आंकड़े पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला. श्री चक्रवर्ती का कहना है कि तृकां के जीत के आतंक से ही माकपा-कांग्रेस के बीच यह भरत मिलाप है.
