फूडपार्क की जमीन वापस लेने की प्रक्रिया शुरू

मालदा. मालदा के फूडपार्क में खाली पड़ी जमीन को वापस लेने की प्रक्रिया राज्य सरकार ने शुरू कर दी है. इसके तहत आज चार कंपनियों को राज्य सरकर की ओर से नोटिस भेजा गया है. इन चार कंपनियों में से तीन प्लॉट के मालिक एक चिटफंड कंपनी है. आज यह जानकारी देते हुए फूडपार्क के […]

मालदा. मालदा के फूडपार्क में खाली पड़ी जमीन को वापस लेने की प्रक्रिया राज्य सरकार ने शुरू कर दी है. इसके तहत आज चार कंपनियों को राज्य सरकर की ओर से नोटिस भेजा गया है. इन चार कंपनियों में से तीन प्लॉट के मालिक एक चिटफंड कंपनी है. आज यह जानकारी देते हुए फूडपार्क के इंचार्ज राजशेखर मित्र ने बताया कि वर्तमान में फूडपार्क में सिर्फ चार कंपनियों ने ही अपने कारखाने लगाये हैं. बाकी कंपनियों ने जमीन तो खरीद ली है, लेकिन फैक्टरी लगाने की दिशा में कोई पहल नहीं की.

इन कंपनियों को यहां अतिशीघ्र कारखाना लगाने की हिदायत दी गई थी. उसके बाद भी इन कंपनियों ने कोई कार्रवाई नहीं की. हालांकि अभी भी इस फूडपार्क में 10 प्लॉट खाली है. निवेशकों को आकर्षित करने के लिए राज्य सरकार ने प्लॉटों की कीमत भी बता दी है. उसके बाद काफी संख्या में कंपनियां यहां प्लॉट खरीदना चाह रही है. कई कंपनियों ने राज्य सरकार को इसके लिए आवेदन भी दिया है. मालदा शहर के रविन्द्र भवन संलग्न 34 नंबर राष्ट्रीय सड़क के पास 38.12 एकड़ जमीन पर इस फूडपार्क की स्थापना की गई है. 17 जुलाई 2005 को राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य ने इस फूडपार्क का उद्घाटन किया था. करीब 33 करोड़ रुपये खर्च कर इस फूडपार्क का निर्माण किया गया है. तब से लेकर अब तक यह फूडपार्क राज्य सरकार के लिए सफेद हाथी साबित हो रहा है. हर महीने ही राज्य सरकार की ओर से बिजली बिल तथा अन्य मदों में कई लाख रुपये दिये जा रहे हैं.

करीब डेढ़ लाख रुपये महीने की दर से बिजली बिल का भुगतान किया जा रहा है, जबकि 50 हजार रुपये महीने का अन्य खर्चा भी है. फूडपार्क के कर्मचारियों से मिली जानकारी के अनुसार 2005 में उद्घाटन के बाद से ही इस फूडपार्क की स्थिति बदहाल है. तमाम कोशिशों के बावजूद यहां कल-कारखानों की स्थापना नहीं की जा सकी. यहां कुल 35 प्लॉट हैं जिसमें से तीन में ही कारखाने चल रहे हैं. डेयरी, चिउरा मिल तथा बोतलबंद पानी की फैक्टरी यहां पर है. एक से डेढ़ एकड़ के करीब 35 प्लॉट होने के बाद भी यहां फैक्टरी की स्थापना नहीं होना अपने आप में आश्चर्यजनक है. यह फूडपार्क पूरी तरह से विरान है. दिन भर यहां जानवरों का बसेरा लगता है, जबकि शाम होते ही जुआरी तथा बदमाश यहां अड्डा जमाते हैं. शराबियों का भी यहां जमावड़ा लगा रहता है.

डीएम ने आरोपों को नकारा
दूसरी तरफ मालदा के जिला शासक शरद द्विवेदी ने मालदा चेम्बर ऑफ कॉमर्स के इन आरोपों को खारिज कर दिया है. उन्होंने कहा है कि शुरू में म्युटेशन की समस्या थी, जो अब नहीं है. उद्योगपतियों के साथ इस मुद्दे को लेकर प्रशासन की ओर से दो बार बैठक भी की गई है. बैंकों द्वारा लोन नहीं दिये जाने की बात सामने आ रही है और जिला प्रशासन ने इस मुद्दे को निपटाने के लिए बैंकों से बातचीत भी की है. श्री द्विवेदी ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से उद्योगपतियों को हर तरह की सहायता उपलब्ध कराने की बात कही गई है. उसके बाद भी उद्योगपति यहां कल-कारखाना लगाने में अपनी दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं. ऐसे में राज्य सरकार ने उद्योग नहीं लगाने वाले उद्योगपतियों से जमीन वापस लेने का निर्णय लिया है. इसी सिलसिले में जमीन वापस लेने की प्रक्रिया शुरू हो गई है और चार कंपनियों को नोटिस भेज दिया गया है. इस बात की जानकारी मुख्यमंत्री कार्यालय नवान्न को भी दे दी गई है.
क्या कहते हैं मंत्री
राज्य के खाद्य तथा प्रसंस्करण मंत्री कृष्णेन्दू चौधरी ने कहा है कि राज्य सरकार द्वारा जमीन की कीमत कम कर दिये जाने के बाद काफी संख्या में उद्योगपति यहां जमीन लेकर उद्योग लगाना चाहते हैं. पहले यहां जमीन की कीमत डेढ़ करोड़ रुपये से अढ़ाई करोड़ रुपये प्रति एकड़ रखी गई थी. अभी इस फूडपार्क में जमीन की कीमत राज्य सरकार ने 85 लाख रुपये प्रति एकड़ निर्धारित कर दी है. मंत्री कृष्णेन्दू चौधरी ने आगे कहा कि इस फूडपार्क में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग ही लगाना पड़ेगा,इसकी जानकारी उद्योगपतियों को नहीं थी. इसी वजह से इस प्रकार की परेशानी सामने आयी है. कई लोगों ने यहां जमीन तो खरीद ली, लेकिन उद्योग लगाने में दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं. अभी भी यहां 10 प्लॉटांे की बिक्री नहीं हुई है.
सरकार पर असहयोग का आरोप
इस बीच, इस फूडपार्क में कारखाना नहीं खोले जाने को लेकर मालदा मर्चेन्ट्स चेम्बर ऑफ कॉमर्स ने राज्य सरकार पर असहयोग का आरोप लगाया है. इस संगठन के अध्यक्ष जयंती कुंडू का कहना है कि जिन लोगों ने यहां जमीन खरीदी है, उन्हें अब तक म्यूटेशन नहीं मिला है. वगैर म्यूटेशन के लोन लेने में समस्या हो रही है. प्रशासन से बार-बार गुजारिश करने के बाद भी कोई लाभ नहीं हुआ. प्रशासन द्वारा सहयोग नहीं किये जाने की वजह से कोई भी व्यवसायी यहां अपना कल-कारखाना लगाना नहीं चाहता.

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