शख्सियत: आज भी आंदोलन से पीछे नहीं हटते हैं 87 वर्षीय चित्त दे

जलपाईगुड़ी. 87 वर्ष की आयु में भी श्रमिक नेता चित्त दे आंदोलन का नेतृत्व करने में पीछे नहीं हटते हैं.आज जलपाईगुड़ी शहर के पीडब्ल्यूडी मोड़ पर महिला चाय श्रमिकों द्वारा आयोजित पथावरोध आंदोलन के दौरान वह सबसे आगे खड़े थे. उन्होंने जुलूस के दौरान दो किलोमीटर पैदल सफर किया. चित्त दे करीब 58 सालों से […]

जलपाईगुड़ी. 87 वर्ष की आयु में भी श्रमिक नेता चित्त दे आंदोलन का नेतृत्व करने में पीछे नहीं हटते हैं.आज जलपाईगुड़ी शहर के पीडब्ल्यूडी मोड़ पर महिला चाय श्रमिकों द्वारा आयोजित पथावरोध आंदोलन के दौरान वह सबसे आगे खड़े थे. उन्होंने जुलूस के दौरान दो किलोमीटर पैदल सफर किया. चित्त दे करीब 58 सालों से चाय श्रमिक आंदोलन में शामिल होते आ रहे हैं.
सन 1994 से वह चाय श्रमिक यूनियनों के को-ऑर्डिनेशन कमेटी का कार्यभार संभाल रहे हैं. संगठन का हर एक शख्स उनका आदर करता है. चित्त दे आज भी सफेद धोती-कुर्ता पहन कर पैरों में चप्पल पहन कर श्रमिक मुहल्ले में आंदोलन का नेतृत्व करते हैं. बाकी श्रमिक नेताओं से अलग होने के कारण सभी उन्हें पसंद करते हैं.
अंग्रेज शासनकाल में डुवार्स के जमीन पर हुए तेभागा आंदोलन का भी उन्हें अनुभव प्राप्त है. चाय श्रमिकों की विभिन्न मांगों के समर्थन में वह अरसों से आंदोलन करते आ रहे हैं. उनका कहना है कि श्रमिकों के अधिकार के लिए वह अपनी जिंदगी की आखिरी सांस तक आंदोलन चलाते रहेंगे. बागान के श्रमिक से लेकर सरदार तक उन्हें देखते ही सलाम ठोकते हैं.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >