भाजपा के जिला महासचिव नंदन दास ने कहा है कि तीन और चार सितंबर को पार्टी की ओर से सामूहिक हस्ताक्षर अभियान की शुरूआत की जायेगी. सिलीगुड़ी शहर की आबादी सात लाख से अधिक है और इस शहर को निश्चित रूप से स्मार्ट सिटी परियोजना में शामिल किया जाना चाहिए. उन्होंने राज्य सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य की तृणमूल सरकार ने इस मामले में सिलीगुड़ी की पूरी तरह से उपेक्षा की. तृणमूल कांग्रेस सरकार द्वारा सिलीगुडी का नाम स्मार्ट सिटी परियोजना हेतु केन्द्र सरकार को नहीं भेजने के कारण ही यह समस्या हुई है. श्री दास ने कहा कि तीन और चार तारीख को स्मार्ट सिटी परियोजना में सिलीगुड़ी का नाम शामिल करने को लेकर आवेदन पर हजारों लोगों के हस्ताक्षर कराये जायेंगे. यह कॉपी केन्द्र सरकार के साथ-साथ राज्य सरकार को भी भेजी जायेगी. उन्होंने कहा कि वह राज्य की तृणमूल सरकार से इस बात का अनुरोध करेंगे कि वह सिलीगुड़ी शहर को स्मार्ट सिटी परियोजना में शामिल करने का एक प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेजे. बाकी का काम भाजपा करेगी. उन्होंने आगे कहा कि केन्द्र सरकार ने 100 शहरों को स्मार्ट सिटी बनाने का निर्णय लिया है. अभी 98 शहरों के नामों की घोषणा हुई है. दो शहरों के नामों की घोषणा होनी बाकी है. भाजपा की कोशिश रहेगी कि इन दो शहरों में सिलीगुड़ी के नाम को भी शामिल कर लिया जाये.
उन्होंने आगे कहा कि हस्ताक्षर अभियान के बाद एक ज्ञापन लेकर भाजपा नेता नई दिल्ली जायेंगे. वहां केन्द्रीय मंत्री वेंकैया नायडू से मिलकर सिलीगुड़ी शहर को स्मार्ट सिटी परियोजना में शामिल करने की मांग की जायेगी. इस बीच, इस मुद्दे को लेकर सिलीगुड़ी में सभी राजनीतिक दलों के नेता एक-दूसरे भिड़े हुए हैं. सभी एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहरा कर अपना पल्ला झाड़ने में लगे हुए हैं. तृणमूल कांग्रेस ने सिलीगुड़ी का नाम स्मार्ट सिटी परियोजना में शामिल नहीं होने को लेकर सिलीगुड़ी नगर निगम के वाम मोरचा बोर्ड पर निशाना साधा है. यहां तक कि उत्तर बंगाल विकास मंत्री गौतम देव ने मेयर अशोक भट्टाचार्य का इस्तीफा तक मांगा है. दूसरी ओर मेयर अशोक भट्टाचार्य का कहना है कि नगर निगम की इस मामले में कोई भूमिका नहीं होती है. राज्य सरकार जब तक किसी शहर का प्रस्ताव केन्द्र सरकार को नहीं भेजे, तब तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकती. उन्होंने राज्य सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि राज्य की तृणमूल सरकार की भेदभाव की नीति की वजह से सिलीगुड़ी के लोगों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है.
