हाल ही में मीडिया के पास नये संगठन का विज्ञप्ति पहुंचा है. जिसमें एसएस खापलिंग, अभिजीत असम, जीवन सिंह व बी साउराइगावरा के हस्ताक्षर के साथ यह मांग की गयी है कि प्रभुता के सवाल पर किसी भी तरह के आतंकी वारदात को अंजाम देने में यह संगठन प्रतिबद्ध है. खुफिया सूत्रों के अनुसार, नये उग्रवादी संगठन के उत्थान को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से उत्तर-पूर्व भारत के सातों राज्यों को विशेष रूप से सतर्क किया गाय है. प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोरोलैंड (एनडीएफबी) के शीर्ष पद पर संगठन के महासचिव बी सावराइगावरा को बिठाये जाने की खबर से केंद्रीय गृह मंत्रालय से लेकर पुलिस-प्रशासन चिंतित है. हालांकि किसी ने इस बारे में मीडिया के सामने कुछ नहीं कहा. सिर्फ इस उग्रवादी संगठन के नेतृत्व के फेरबदल से ही नहीं बल्कि केएलओ के सुप्रीमो जीवन सिंह भी पुलिस व खुफिया विभाग के अधिकारियों के चिंता का कारण बना हुआ है. एनडीएफबी के शीर्ष पद पर एक बड़े नेता को पाकर फिर संगठन मजबूत हो उठा है. एनडीएफबी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, संगठन के पूर्व शीर्ष नेता सतबीजीत नार्जिनारी बोरो संप्रदाय के व्यक्ति नहीं होने के कारण संगठन के ज्यादातर कार्यकर्ता उन्हें स्वीकार नहीं कर पा रहे थे. आखिर में सतबीजीत को पीछे हटना पड़ा. वर्तमान में वह संगठन के सलाहकार मंडली में है. इधर, खुफिया विभाग को जांच के दौरान यह भी पता चला कि हाल ही में जीवन सिंह असम के कोकराझार जिले के एक गांव में रह कर गये हैं. यहां से उन्होंने निकटतम कई रिश्तेदारों से मुलाकात की, लेकिन पुलिस, सेना वाहिनी व खुफिया विभाग को इस बात की भनक तक नहीं लगी.
पश्चिम बंगाल से केएलओ के बड़े बड़े नेता पकड़े गये हैं, लेकिन जीवन सिंह अभी पुलिस के गिरफ्त से बाहर है. खुफिया विभाग को पता चला है कि जीवन सिंह म्यांमार व बांग्लादेश होकर उत्तर-पूर्वांचल के राज्यों में घुम रहे हैं और नये सिरे से केएलओ को मजबूत करने में जुटा हुआ है. पुलिस किसी हालत में उसे नहीं पकड़ पा रही है. उत्तर बंगाल पुलिस के एक अधिकारी के अनुसार पश्चिम बंगाल में केएलओ को बर्चस्व खास नहीं है, लेकिन पड़ोसी राज्य असम में केएलओ की गतिविधि मजबूत हो रही है. सार्विक स्थिति पर नजर रखी जा रही है. उल्लेखनीय है कि बीते 17 अप्रैल को नागालैंड के दूर्गम पहाड़ी इलाके में उत्तर-पूर्वांचल भारत के चार प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन के शीर्ष नेतागण एकत्रित हुए थे. पुलिस व खुफिया विभाग के आंखों में धूल झोकर कर कई घंटों तक उग्रवादी संगठनों की बैठक चलती रही. एक के बाद एक घट रहे उग्रवादी वारदात से यह साफ है कि असम समेत उत्तर-पूर्वांचल के राज्यों में उग्रवादी गतिविधियों पर नजर रखने पुलिस तथा खुफिया विभाग काफी हदतक व्यर्थ साबित हो चुकी है.
