इन दोनों स्थानों के अलावा भी विभिन्न स्थानों पर छोटी-बड़ी भूस्खलन की घटनाएं हुई हैं. इस भूस्खलन में जहां कई लोगों की मौत हो गई थी, वहीं काफी संपत्ति का भी नुकसान हुआ था. कालिम्पोंग तथा मिरिक में पेयजल के पाइप लाइन पूरी तरह से तबाह हो गये थे. करीब डेढ़ महीने का समय बीत जाने के बाद भी पीएचई विभाग ने पाइप लाइनों की मरम्मती नहीं करवायी है. जिसकी वजह से पहाड़ के लोगों को पेयजल की समस्या का सामना करना पड़ रहा है. गरमी के मौसम में ऐसे ही दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में पेयजल की किल्लत होती है. ऊपर से क्षतिग्रस्त पाइप लाइनों ने इस समस्या को और भी विकराल बना दिया है. आम लोगों को पेयजल लाने के लिए काफी दूर जाना पड़ता है. इसके अलावा मोटी कीमत पर आम लोगों को पेयजल खरीदनी पड़ती है. पीएचई की ओर से पाइप लाइनों द्वारा विशुद्ध पेयजल की आपूर्ति की जाती है.
काफी लोगों ने अपने-अपने घरों में पीएचई का कनेक्शन ले रखा है. इसके अलावा सार्वजनिक स्थानों पर लगे पीएचई के नलों से भी भारी संख्या में लोग पानी का संग्रह करते हैं. अब जब पेयजल की आपूर्ति बंद है, तो कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं के साथ ही आम लोग भी परेशान हैं. आम लोगों को पानी के अन्य संसाधनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जिसकी वजह से जलवाही रोगों के पनपने की संभावना भी बढ़ गई है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि कालिम्पोंग नगरपालिका के 23 वार्डों में रहने वालों के साथ-साथ आसपास के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले करीब 50 हजार से अधिक लोग इससे प्रभावित हो रहे हैं. स्थानीय लोगों ने आरोप लगाते हुए कहा कि जिन कुछ स्थानों में पाइप लाइन के जरिये पेयजल की आपूर्ति की जा रही है, वहां पानी की गुणवत्ता ठीक नहीं है. स्थानीय लोगों ने पीएचई विभाग से यथाशीघ्र पाइप लाइनों की मरम्मत कर पेयजल आपूर्ति व्यवस्था सुदृढ़ करने की मांग की है.
