केवल पूर्व मंत्री कृष्णेंदु नारायण चौधरी एवं उनकी पत्नी की सीट सुरक्षित
मालदा : इस के आसन्न तृणमूल संचालित नगरपालिका चुनाव में दल के चार दंपती अपने अपने वार्ड से चुनाव नहीं लड़ सकेंगे. हालांकि पूर्व मंत्री सह चेयरमैन कृष्णेंदु नारायण चौधरी और उनकी पत्नी काकली चौधरी अपने पूर्व वार्ड से चुनाव लड़ सकेंगे. इस बीच नरेंद्रनाथ तिवारी ने अपने वार्ड आरक्षण को लेकर असंतोष जाहिर करते हुए अदालत में अर्जी दाखिल की है.
बाकी प्रत्याशी भी टिकट के लिये जद्दोजहद में जुटे हैं. समझा जाता है कि तृणमूल का राज्य नेतृत्व नगरपालिका चुनाव में नये चेहरों को उतारने का हिमायती है. उल्लेखनीय है कि वर्ष 2015 में नगरपालिका चुनाव के लिये सीट आरक्षण के चलते वर्तमान चेयरमैन नीहार घोष का 16 नंबर वार्ड महिलाओं के लिये आरक्षित हो गया था. उसके बाद नीहार घोष अपने वार्ड से अपनी पत्नी गायत्री घोष को खड़ाकर खुद 15 नंबर वार्ड से विजयी हुए. इस तरह से दोनों पति पत्नी चुन लिये गये थे.
बाकी प्रत्याशियों में नरेंद्रनाथ तिवारी और उनकी पत्नी अंजू तिवारी कांग्रेस के टिकट पर विजयी हुए और फिर तृणमूल में शामिल हो गये. लेकिन इस बार वे दोनों अपने पूर्व वार्ड से चुनाव नहीं लड़ सकेंगे. इसी तरह नीहार घोष और उनकी पत्नी गायत्री घोष वामफ्रंट के टिकट पर चुने जाने के बाद तृणमूल में शामिल हुए.
ये दोनों भी इस बार अपने पूर्व वार्ड से चुनाव नहीं लड़ सकेंगे. इस बार नगरपालिका के वाइस चेयरमैन बाबला सरकार और चैताली घोष सरकार की सीट को लेकर भी संशय कायम है. प्रशासकीय सूत्र के अनुसार इस बार नगरपालिका के कुल 29 वार्ड में से 1, 3, 6, 9, 12, 15, 18, 21 और 25 नंबर वाड्र महिलाओं के लिये आरक्षित हो गयीं हैं. इनके अलावा 22, 26 और 27 नंबर वार्ड अनुसूचित जाति के लिये आरक्षित की गयी हैं.
22 नंबर वार्ड के पार्षद नरेंद्रनाथ तिवारी ने बताया कि सीट आरक्षण को लेकर साजिश रची गयी है. उनके वार्ड में अनुसूचित जाति की आबादी 10 फीसदी भी नहीं है. फिर भी कैसे यह वार्ड अनु. जाति के लिये आरक्षित की गयी, समझ से परे है. दल के शीर्ष नेतृत्व को इसकी जानकारी दी गयी है. अदालत में मामला दर्ज कराया है. उसके बाद जो फैसला आयेगा उसे सिर झुकाकर मान लेंगे. अंजू तिवारी ने कहा कि आरक्षण के चलते कई पार्षद इस बार प्रत्याशी नहीं हो सकेंगे. हम लोग शुरु से तृणमूल में हैं. दल चाहेगा तो हम लोग प्रत्याशी बनेंगे.
उधर, पूर्व मंत्री कृष्णेंदु नारायण चौधरी और काकली चौधरी ने कहा कि सीट आरक्षण की पद्धति तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के समय से चली आ रही है. जनता के प्रति जवाबदेही असली मानदंड है. दल जनहित में इस तरह के फैसले लेती है. वहीं, नीहार घोष और गायत्री घोष ने कहा कि दल ही तय करेगा कि कौन कहां से चुनाव लड़ेगा. यहां दल ही सर्वोच्च है व्यक्ति नहीं.
