दो हाथियों ने पांच घर तोड़े

दक्षिण धूमपाड़ा में सब्जी की फसलों को भी किया तबाह नागराकाटा : डुआर्स में हाथियों के हमले आये दिन हो रहे हैं और खासतौर पर इनका निशाना गरीब परिवार हो रहे हैं. इसी क्रम में दक्षिण धूमपाड़ा में दो हाथियों ने पांच घरों को तोड़ दिया. उस दौरान अपनी तीन संतानों को लेकर किसी तरह […]

दक्षिण धूमपाड़ा में सब्जी की फसलों को भी किया तबाह

नागराकाटा : डुआर्स में हाथियों के हमले आये दिन हो रहे हैं और खासतौर पर इनका निशाना गरीब परिवार हो रहे हैं. इसी क्रम में दक्षिण धूमपाड़ा में दो हाथियों ने पांच घरों को तोड़ दिया. उस दौरान अपनी तीन संतानों को लेकर किसी तरह महिला जान बचाकर भाग निकली. यह घटना गुरुवार की देर रात को हुई जिसके बाद से इलाके के लोग डरे सहमे हुए हैं.
स्थानीय लोगों का आरोप है कि खबर देने के बावजूद वनकर्मी घटनास्थल पर नहीं पहुंचे. इन लोगों ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है. वहीं, नाथुआ रेंज के रेंजर विष्णुपद राय ने बताया कि पांच में से दो घरों को ज्यादा नुकसान पहुंचा है. सभी को क्षतिपूर्ति के लिये आवेदन करने के लिये कहा गया है. एलिफेंट स्क्वाड को सतर्क किया गया है. जरूरी कदम उठाये जा रहे हैं.
जानकारी अनुसार गुरुवार की रात 10 बजे के करीब एक साथ दो हाथियों ने दक्षिण धूमपाड़ा में प्रवेश किया जिसके बाद तड़के चार बजे तक दोनों गजराज इलाके में जमे रहे. स्थानीय सूत्र के अनुसार हाथियों ने हरिदास दास, प्रदीप राय, सुरेश राय, गोपाल सरकार और गोविंद दास के घरों को तोड़ दिया. सबसे प्रभावित हुआ है हरिदास दास का परिवार. हरिदास दास केरल में काम करते हैं. हाथियों ने टिन के घरों को पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया है. उस समय सो रहीं हरिदास दास की पत्नी अपने तीन बच्चों को लेकर किसी तरह भाग निकलकर अपनी जान बचायी.
स्थानीय निवासीर श्यामल दास ने बताया कि गांव में हाथियों के चलते रहना दूभर हो गया है. सूचना देने पर भी वनकर्मी नहीं पहुंचते हैं. इसलिये हमने सड़क पर उतरकर आंदोलन करने का मन बनाया है. कृषि प्रधान धूमपाड़ा के लोगों का कहना है कि हाथियों ने दक्षिणी हिस्से में लगी आलू, मिर्च, मूली, बीन्स, बंधागोभी और मटर की फसलों को तबाह कर दिया है.
इस दौरान रामू उरांव, श्यामल दास और दुलाल दास की फसलों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है. इन्होंने बताया कि डायना जंगल से आकर ये हाथी पूरी रात कहर बरपाते हैं. यहां तक कि अगली सुबह छह बजे तक गांव की सड़क पर चहलकदमी करते हैं. इस तरह की घटना पहले नहीं होती थी.

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