चार महीने बाद भी मास्टरमाइंड पुलिस की गिरफ्त से दूर

सिलीगुड़ी : वर्धमान रोड़ स्थित मुथूट फाइनेंस में सोना लूटकांड की गुत्थी को सुलझाने में सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस की नाकामी साफ झलक रही है. चार महीने बाद भी लूटकांड के मास्टरमाइंड को पुलिस गिरफ्तार नहीं कर पायी है. आरोप है कि इस कांड को दबाने के लिए पुलिस छोटे मोटे केश को मीडिया के सामने […]

सिलीगुड़ी : वर्धमान रोड़ स्थित मुथूट फाइनेंस में सोना लूटकांड की गुत्थी को सुलझाने में सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस की नाकामी साफ झलक रही है. चार महीने बाद भी लूटकांड के मास्टरमाइंड को पुलिस गिरफ्तार नहीं कर पायी है.

आरोप है कि इस कांड को दबाने के लिए पुलिस छोटे मोटे केश को मीडिया के सामने रखकर मामले को दबाने का प्रयास कर रही है. इस पूरे घटना को अंजाम देने वाले मास्टरमाइंड से मुलाकात करने वाले दो आरोपी सनातन केरी व खिरोद चंद्र बल को भी पुलिस ने जमानत पर रिहा कर दिया है. घटना के चार महीने बाद भी पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है.
गौरतलब है कि 24 अगस्त शनिवार की दोपहर तीन बजे वर्धमान रोड स्थित मुथूट फाइनेंस में पांच लुटेरों ने हथियार दिखाकर 45 किलों सोना लूट लिया था.घटना को अंजाम देने वाले आरोपियों का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया था. जिसके बाद पुलिस ने पूरे शहर में जोरर नाका चेकिंग शुरू कर दी थी.
इस घटना के 24 घंटे के भीतर ही आसीघर आउट पोस्ट के घुघुमाली बाजार इलाके में एक ज्वेलरी की दुकान में डाका डाला गया. इन तमाम घटनाओं के बाद पूरी पुलिस टीम व खुफिया एजेंसी हरकत में आ गई थी.
इसी बीच 28 अगस्त को बागडोगरा के गदाधर पल्ली इलाका निवासी विष्णु घोष ने बागडोगरा थाना में शिकायत दर्ज करायी. जिसमें उन्होंने बताया था कि उनके घर में पांच युवक किराये पर रहते थे. लेकिन घटना वाले दिन से सभी फरार हैं.
जांच में जुटह पुलिस ने विष्णु घोष के घर उन युवकों के कमरे से एक जूता कंपनी का बिल बरामद किया था. जहां घटना से पहले पांच स्पोर्ट्स शू खरीदे गये थे. सबूत जुटाने और सीसीटीवी फुटेज खांगालने के बाद पुलिस ने फूंक-फूंक कर जांच अभियान को आगे बढ़ाया.
इसी बीच सितंबर महीने में पुलिस उड़ीसा के संबलपुर से पांच युवकों को गिरफ्तार कर सिलीगुड़ी ले आई. 22 सितंबर को कोर्ट में पेशी के बाद उन पांचों के नाम का खुलासा अशोक मांझी, सनातन केरी, अशोक चंद्र मेहेर, दिलेश्वर मेहेर, खिरोद चंद्र बल के रूप में किया गया.
उन पांचों पर विभिन्न धाराओं को लगाते हुए कोर्ट में पेशी के बाद 14 दिनों के लिए पुलिस रिमांड पर लिया गया. उस वक्त पुलिस सूत्रों ने बताया था कि अशोक चंद्र मेहेर व दिलेश्वर मेहेर की मोबाइल दुकान से अशोक मांझी ने एक लाख रुपये में तीन सिम खरीदे थे. उसके बाद अशोक ने सीम कार्ड सनातन केरी व खिरोद चंद्र बल को दे दिया था. इन दोनों ने ही उस सिम कार्ड को लुटेरों तक पहुंचाया था. पांचों को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस सुस्त पड़ गई.
इस घटना के 120 दिन बाद भी पुलिस की नाकामी साफ झलक रही है. पुलिस सूत्रों के मुताबिक उन पांचों की गिरफ्तारी के दो महीने बाद ही शनिवार को अशोक मांझी, सनातन केरी तथा खिरोद चंद्र बल को बेल पर रिहा कर दिया गया है. जिससे लूटकांड की जांच का मामला पेचीदा हो गया है.
इस संबंध में सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस की इस्ट जोन-1 की डीसीपी इंदिरा मुखर्जी ने बताया कि लूटकांड की छानबीन चल रही है. इसकी जांच के ललिए अलग से पुलिस टीम का गठन किया गया था. उन्होंने स्वीकार किया कि अभी कई आरोपियों की गिरफ्तारी बाकी है. जल्द ही मास्टरमाइंड को गिरफ्तार कर लिया जायेगा.

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