खुदरा बाजार की पिच पर प्याज ने जड़ी सेंचुरी

सिलीगुड़ी समेत आसपास के इलाकों में 100 रुपये किलो बिक रहा नयी फसल के आने तक और रुलायेगा प्याज 15-20 दिनों से पहले कीमतों में गिरावट के कोई आसार नहीं सिलीगुड़ी : दिन-प्रतिदिन प्याज की कीमतों में आग लग रही है. सिलीगुड़ी समेत उत्तर बंगाल की प्रमुख व्यापारिक मंडियों में प्याज का दाम सौ रुपये […]

सिलीगुड़ी समेत आसपास के इलाकों में 100 रुपये किलो बिक रहा

नयी फसल के आने तक और रुलायेगा प्याज

15-20 दिनों से पहले कीमतों में गिरावट के कोई आसार नहीं

सिलीगुड़ी : दिन-प्रतिदिन प्याज की कीमतों में आग लग रही है. सिलीगुड़ी समेत उत्तर बंगाल की प्रमुख व्यापारिक मंडियों में प्याज का दाम सौ रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है. अच्छी गुणवत्ता वाली लाल छिलकेवाली प्याज की कीमत खुदरा बाजार में सौ रूपये प्रति किलो है. वहीं छोटे आकारवाली व सादे छिलकेवाली प्याज की कीमत 80 रुपये प्रति किलो है.

सिलीगुड़ी का खुदरा बाजार चंपासारी बाजार, विधान मार्केट का खुदीराम पल्ली बाजार, महावीरस्थान रेलगेट, सिलीगुड़ी थाना के सामने केला हट्टी, खालपाड़ा बाजार, टिकियापाड़ा बाजार, हैदरपाड़ा बाजार, सालुगाड़ा बाजार, देवीडांगा बाजार, दार्जिलिंग मोड़ का बाजार, नवग्राम गेटबाजार, माटीगाड़ा, फूलबाड़ी, शिवमंदिर, बागडोगरा, नक्सलबाड़ी, खोरीबाड़ी, फांसीदेवा, घोषपुकुर, विधाननगर समेत सभी हाट-बाजारों में प्याज की खुदरा कीमत में आसमानी उछाल दिख रहा है.

वहीं थोक मंडी में छोटे आकारवाली प्याज की कीमत 70-75 रुपये प्रति किलो और लाल छिलकेवाली प्याज की कीमत 80-90 रूपये प्रति किलो है. प्याज कारोबारियों की मानें तो नयी फसल न आने तक प्याज अभी और रूलायेगी. 15-20 दिनों से पहले प्याज की कीमत में गिरावट की कोई संभावना नजर नहीं आ रही है. उत्तर बंगाल में सब्जियों व फलों की सबसे बड़ी मंडी सिलीगुड़ी रेगुलेटेड मार्केट के आलु पट्टी के एक प्याज कारोबारी राजेश जायसवाल का कहना है कि इस बार बारिश होने की वजह से प्याज की फसल काफी बड़े पैमाने पर नष्ट हो गयी थी.

जब प्याज की पैदावार हुई तभी तकरीबन डेढ़-दो महीने पहले काफी बारिश हुई और मंडियों में आने से पहले ही खेतों में ही नष्ट हो गये. प्याज की आपूर्ति से कहीं अधिक खपत होने के वजह से ही इस साल हर जगहों पर प्याज की कीमतों में आग लगी हुई है. एक सवाल के जवाब में जायसवाल ने कहा कि केवल सिलीगुड़ी या उत्तर बंगाल व असम ही नहीं, बल्कि देश के अन्य राज्यों में भी इस साल प्याज की पैदावार काफी कम हुई है. कारोबारी कहां से स्टॉक करेंगे.

कालाबाजारी करने लायक इस बार प्याज का फसल हुआ ही नहीं. श्री जायसवाल ने बताया कि महाराष्ट्र के नासिक, राजस्थान के अलवर, मध्य प्रदेश के इंदौर, गुजरात, आंध्र प्रदेश के हैदराबाद, कर्नाटक के बंगलुरु व दक्षिण भारत के राज्यों से प्याज पूरे देश में जा रहा है. सिलीगुड़ी में भी इन्हीं राज्यों से ही प्याज आ रहा है.

प्याज ने बदल डाला रसोई का जायका

खालपाड़ा के सब्जी बाजार से खरीदारी कर रही एक गृहिणी वीणा मोर का कहना है कि प्याज की महंगाई ने रसोई का जायका ही बदल डाला है. प्याज का दाम ही इतना अधिक है कि केवल जरूरत के अनुसार ही पाव भर के हिसाब से प्याज लेना पड़ रहा है. वहीं दैनिक मजदूरी कर अपना घर-संसार चलानेवाले एक दिहाड़ी रामेश्वर प्रसाद का कहना है कि पहले रोटी-प्याज व नमक के साथ दोपहर का भोजन भरपेट हो जाता था. लेकिन प्याज की आसमान छूती कीमत की वजह से अब रोटी-प्याज पर भी आफत आ गया है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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