डुआर्स में सबसे प्राचीन है हैमिल्टनगंज की काली पूजा

103 वर्ष पुरानी है यहां की काली पूजा, 14 दिनों तक लगेगा मेला 27 अक्तूबर से होगा मेला का शुभारंभ कालचीनी : पूरे डुआर्स में हैमिल्टनगंज के काली पूजा को सबसे प्राचीन पूजा माना जाता है. अलीपुरद्वार जिले के कालचीनी ब्लॉक स्थित हैमिल्टनगंज कालीबाड़ी मैदान में आयोजित कालीपूजा 103 वर्षों से चली आ रही पौराणिक […]

103 वर्ष पुरानी है यहां की काली पूजा, 14 दिनों तक लगेगा मेला

27 अक्तूबर से होगा मेला का शुभारंभ

कालचीनी : पूरे डुआर्स में हैमिल्टनगंज के काली पूजा को सबसे प्राचीन पूजा माना जाता है. अलीपुरद्वार जिले के कालचीनी ब्लॉक स्थित हैमिल्टनगंज कालीबाड़ी मैदान में आयोजित कालीपूजा 103 वर्षों से चली आ रही पौराणिक पूजा है. यहां विगत 1917 से बक्सा डुआर्स टी कंपनी लिमिटेड के यूरोपियन साहोबो ने अपने हाथों से पूजा की शुरुआत की थी.

इसके पश्चात पूजा के उपलक्ष्य में यहां ऐतिहासिक हैमिल्टनगंज मेला भी लगने लगा. जिसका एक महत्वपूर्ण है. माना जाता है कि यह मेला का आयोजन विशेषकर इलाके में काम करनेवाले देश के विभिन्न राज्यों से आए हुए चाय श्रमिकों के लिए किया गया था, ताकि वे यहां से बाहर ना जा पाए.

इस विषय पर हैमिल्टनगंज काली पूजा मेला कमेटी के अध्यक्ष प्रभात मुखर्जी ने बताया कि यह पूजा ब्रिटिश शासनकाल से चली आ रही है. यह पूजा व मेले की शुरुआत चाय बागानों के यूरोपियन साहबो ने किया था. यह मेला खासकर यहां निवास करने वाले चाय श्रमिकों के सामान खरीदारी के लिए किया गया ताकि वे यहां से बाहर ना जाए. उन्होंने कहा कि तभी से यह मेला में प्रतिवर्ष डुआर्स के विभिन्न चाय बागान इलाके से भारी तादाद में स्थानीय व चाय श्रमिक आया करते हैं और मेला के मनोरंजन में डूबकर उत्साहित होते हैं.

सारी रात यह मेला चलती रहती है. उस दौरान यहां इतनी दुकान भी नहीं थीं, लेकिन बाद में धीरे-धीरे हैमिल्टनगंज इलाके के निवासियों के द्वारा यह पूजा व मेला का परिचालन किया जाने लगा. हैमिल्टनगंज के निवासियों ने पौराणिक पूजा व मेला के अस्तित्व को बचा के रखा है. प्राभात मुखर्जी ने कहा कि यहां 2001 तक मां की मिट्टी की मूर्ति स्थापित रही. लेकिन 2001 के बाद पत्थर के मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की गयी. जितने दिन हैमिल्टनगंज में मेला रहती है ऐसा लगता है कि यहां एक छोटा भारत बस गया है. काफी संख्या में लोगों का जमावड़ा इस मेले में देखने को मिलता है. यहां लोगों के मनोरंजन के लिए सर्कस लगते हैं.

विभिन्न प्रकार के झूले लगते हैं. विभिन्न सामानों के दुकान लगाएं जाते हैं. वहीं डुआर्सवासी प्रतिवर्ष इस मेले के इंतजार में रहते हैं. वहींदूसरी और प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी हैमिल्टनगंज कालीबारी मैदान में मेला लगने जा रहा है. विभिन्न इलाके से व्यापारी अपनी दुकानों को लेकर मेले में आ रहे हैं. कमेटी की ओर से मेले में आ रहे व्यापारियों के लिए विभिन्न प्रकार की सुविधाएं का व्यवस्था किया जा रहा है. जिसकी जानकारी कमेटी के सदस्य ने बताई है. सदस्यों ने कहा कि इसवर्ष मेले की शुरुआत आगामी 27 अक्टूबर से प्रारंभ होगी जो लगभग 14 दिनों तक चलेगी.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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