दार्जिलिंग : जीटीए के कार्यवाहक चेयरमैन अनित थापा ने बोनस को लेकर किये गये आमरण अनशन को समर्थन देने के लिये गोरामुमो से लेकर जाप, क्रामाकपा, माकपा, अभागोली, तृणमूल कांग्रेस, कांग्रेस जैसे राजनैतिक दलों को धन्यवाद देने के अलावा भाजपा पर जमकर निशाना साधा.
शुक्रवार को जारी प्रेस बयान के जरिये अनित थापा ने इस सिलसिले में सांसद राजू विष्ट को आड़े हाथ लेते हुए बोनस के लिये किये गये अनशन की निंदा करने और आंदोलनरत श्रमिक संगठनों का मजाक उड़ाने पर तीव्र प्रतिक्रिया दी है.
गोजमुमो के महासचिव ने कहा है कि जब चाय श्रमिकों को 20 फीसदी बोनस के लिये अध्यक्ष विनय तमांग आमरण अनशन पर बैठे थे उस समय उन्हें नैतिक समर्थन देने के लिये अनशन स्थल पर तो नहीं ही गये. उल्टे उन्होंने अनशन करने पर उनकी निंदा भी की है. यह हैरान करने वाली बात है. इस आंदोलन से केवल भाजपा ही अलग रही. हालांकि यह कोई आश्चर्य की बात भी नहीं है.
क्योंकि भाजपा का इतिहास इस बात की तस्दीक करता है कि पहाड़ में जब जब संकट आया है तब तब भाजपा ने किनारा कर लिया है. 2017 के गोरखालैंड आंदोलन के समय भी यही बात हुई थी. उस समय भी भाजपा के किसी वरिष्ठ नेता को मैदान में उतरते हुए नहीं देखा गया.
इस बार भी समर्थन देने की जगह राजू विष्ट ने अनशन को नाटक बताकर उसकी निंदा की थी. जबकि भाजपा के ही विधायक नीरज जिम्बा ने राज्यपाल को पत्र देकर विनय तमांग के गंभीर स्वास्थ्य पर चिंता जतायी थी. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा शुरु से पहाड़वासियों की भावनाओं का वोट बैंक के तौर पर इस्तेमाल करती रही है. उनके लिये चाय बागान और सिन्कोना बागान भी वोट बैंक के मसले ही हैं.
गोरखालैंड की चर्चा करते हुए अनित थापा ने कहा कि अगर पहाड़ की समस्या का स्थायी हल गोरखालैंड होने का दावा भाजपा करती है तो राजू विष्ट को भाजपा की कोर कमेटी में प्रस्ताव पारित कर गोरखालैंड का उल्लेख करना चाहिये. उस हालत में गोजमुमो के सैकड़ों युवा उसके लिये भी आमरण अनशन करेंगे.
लेकिन भाजपा को पहाड़वासियों को भावनात्मक दोहन करना बंद करना होगा. कहा कि गोजमुमो हमेशा से सर्वहारा वर्ग के साथ है. पहाड़ में दादागिरी करते हुए डर दिखाकर शासन करने में गोजमुमो यकीन नहीं करता है. एक तरफ जहां विनय तमांग का इलाज अस्पताल में चल रहा है वहीं, उनकी निष्ठा पर सवाल कर भाजपा नेतृत्व कौन सा संदेश देना चाहते हैं यह स्पष्ट होना चाहिये.
